हरिद्वार। मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ रवींद्र पुरी द्वारा मनसा देवी मंदिर पर कार्यरत कर्मचारियों को शपथ दिलाई गई ,कि वह मंदिर में किसी प्रकार की चोरी नहीं करेंगे। लेकिन अनिल शर्मा ट्रस्टी ने कोई शपथ नहीं ली । हरिद्वार में स्थित माँ मनसा देवी का मंदिर पूरे भारतवर्ष में पहचाना जाता है। इस मंदिर पर रोजाना लाखों रुपए का धन श्रद्धालुओं द्वारा चढाया जाता है।कांवड़ मेले या विशेष स्नान पर्वों पर इस दान की राशि का पता ही नहीं रहता की कितने लाख रुपये रोजाना आ रहे हैं।
दान राशि के साथ-साथ यहां पर सोना चांदी हीरे जवारत भी श्रद्धालु श्रद्धा के साथ मां मनसा देवी को अर्पित करके जाते हैं। कुछ श्रद्धालु अपनी मनसा पूरी होने पर मां के दरबार में पुनः मंदिर आते हैं ,और जो उनसे बनता है वह माँ के दरबार मे अर्पित करके चले जाते हैं। इस सारे माल की देखरेख की जिम्मेदारी अनिल शर्मा के पास है ,यह अनिल शर्मा ट्रस्ट के ट्रस्टी भी है । इनको ट्रस्ट की तरह से कोई वेतन भी नही मिलता है। ये निशुल्क माँ के मंदिर मे सेवा करते है।

डॉक्टर रविंद्र पुरी जी के बाद सबसे मुख्य भूमिका अनिल शर्मा की ही है ,मनसा देवी मंदिर पर आने वाले चढ़ावे दान की धनराशि सोना चांदी हीरे जवारत सब कुछ अनिल शर्मा ही देखते हैं। पूरा धन व बेश कीमती वस्तुएं अनिल शर्मा के नियंत्रण में ही रहती हैं, अभी हाल ही में ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी ने मनसा देवी मंदिर के सभी कर्मचारियों को बाकायदा शपथ दिलाई कि वे मंदिर में आने वाले दान की धनराशि व किसी भी तरीके के सोने चांदी हीरे जवाहरात के आभूषणों की चोरी नहीं करेंगे, सबने हाथ उठाकर शपथ ग्रहण की लेकिन अनिल शर्मा ने शपथ ग्रहण नहीं की क्योंकि अनिल शर्मा को शायद शपथ ग्रहण करने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। इसके पीछे क्या कारण है क्या राज है इसकी जानकारी तो डॉ साहब को ही होगी , अनिल शर्मा पर ही लगते रहते हैं दान की राशि में हेरा फेरी के आरोप।

अनिल शर्मा भी मंदिर पर ही रहते हैं, सारी दान की धनराशि का हिसाब किताब उनके पास ही रहता है ,उन पर ही दान की राशि में हेरा फेरी करने का आरोप लगता रहता है , उसके बावजूद भी उनका शपथ न लेना आश्चर्य व्यक्त करता है,M शपथ ग्रहण की आवश्यकता क्यों, यह भी नहीं समझ में आ रहा है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ रवींद्र पुरी जी को इन सभी कर्मचारियों को शपथ ग्रहण क्यों करानी पड़ी इसका मतलब साफ है कि डॉक्टर रविंद्र पुरी भी मानते हैं, कि मंदिर पर दान की धनराशि व सोने चांदी के आभूषणों की चोरी होती है ,तभी तो उन्होंने इन कर्मचारियों को शपथ दिलाई है, साथ ही यह भी घोषणा कर दी है, कि वहां कार्य करने वाले कर्मचारी बिना जेब का कुर्ता पजामा या जो भी कपड़े होंगे वह पहनेगे, जे पी बडौनी के आरोप, इस प्रकरण को लेकर समाजसेवी जेपी बडौनी का कहना है, की मंदिर पर तमाम तरीके की अनियमितताएं हैं।
हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट और जिला प्रशासन की कोई वैल्यू मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष जी के सामने है ही नही ,जो उनकी मर्जी होती है या अनिल शर्मा की मर्जी होती है ,वही नियम कानून मनसा देवी पर चलते हैं, उनके अलावा कोई नियम कानून वहां पर लागू नहीं होता है। चाहे कोई कितना भी प्रयास कर ले, कोर्ट द्वारा जिला अधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को मनसा देवी गंगा सभा व चंडी देवी का मुख्य वित्त नियंत्रक बनाया हुआ है। लेकिन जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अत्यधिक व्यस्तता के कारण इन दोनों अधिकारियों ने अपने अधिकार सिटी मजिस्ट्रेट व दो अन्य अधिकारियों को प्रदान कर रखे हैं ।

अनिल शर्मा, ट्रस्टी
यह तीनों अधिकारी भी शायद ही कभी मनसा देवी मंदिर पर जाकर दान की धनराशि व चढ़ावे में आने वाले सोना चांदी के आभूषणों की गिनती करवाते हो ,इसलिए मंदिर के ट्रस्टी अनिल शर्मा एक तरीके निरंकुश हो गए हैं, ऊपर से अध्यक्ष जी का उनके सिर पर हाथ इस लिए वे निर्भीक होकर अपना काम करते हैं। शर्मा जी की पावर को देखते हुए मंदिर के अन्य सभी कर्मचारी भी शर्मा जी की जी हजूरी करने में ही अपनी भलाई सझते हैं।
गत वर्ष कांवड़ मेले के ही दौरान मनसा देवी मंदिर पर नौ श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, इसके बाद जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्काल ट्रस्ट की मीटिंग बुलाकर मीटिंग में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने तो यह तक कह दिया था, कि यहां रिसीवर नियुक्त कराया जाना ही उचित होगा ,जिलाधिकारी की यह बात सुन ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ रवींद्र पुरी को परेशानी हुए ,और उन्होंने तत्काल देहरादून की दौड़ लगा दी, उसके बाद मामला ठंडा पड़ गया ,ना कोई रिसीवर नियुक्त हुआ ना किसी तरीके की कोई जरूरत पड़ी।
उन 9 श्रद्धालुओं की मृत्यु के बाद मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महोदय ने सभी मृत श्रद्धालुओं के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए देने की घोषणा भी की थी, जे पी बड़ौनी की बात को सच माना जाए तो वह 5 , 5 लख रुपए अभी तक उन मृतकों के परिजनों को नहीं दिए गए हैं ।

अध्यक्ष जी
एक बात और सामने आई है की कांवर मेले के दौरान या कुंभ मेले के दौरान मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से दो एंबुलेंस प्रशासन को प्रदान की जाती है। मेले के बाद यह एंबुलेंस कहां चली जाती है ,यह किसी को पता नहीं है, इस बात को भी जेपी बड़ौनी ने अपने वक्तव्य में उठाया है ।
मनसा देवी मंदिर के दो कर्मचारी जिनको मंदिर से हटा दिया गया है, उन दोनों का केस हाईकोर्ट में चल रहा है, इन दोनों कर्मचारियों का भी कहना यही है ,की मनसा देवी मंदिर पर दान की धनराशि की चोरी का विरोध करने पर उनको मंदिर से हटाया गया है । चोरी की बात अध्यक्ष जी ने एक तरीके से स्वीकारी है, तभी तो कर्मचारियों को चोरी न करने की शपथ दिलाई गई।
चोरी की बात तो मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी एक तरीके से स्वीकार कर ही चुके हैं। तभी तो उन्होंने अपने तमाम कर्मचारियों को चोरी न करने की शपथ दिलाई है,, और बिना जेब के कुर्ते पजामे उनको सिल्वा कर दिए जा रहे हैं ।
अनिल शर्मा ने शपथ नही ली,ना अध्यक्ष जी ने उन्हें शपथ लेने के लिये कहा, एक जमाने मे थ्री विहलर चला कर रोजी रोटी का जुगाड़ करने वाले अनिल शर्मा जब से मंशा देवी ट्रस्ट के ट्रस्टी बने हैं। उनकी मौज आ रही है, मंदिर पर आने वाले सोना चांदी व धन की ,यदि कुछ जानकारी होगी तो हरिद्वार के ट्रेजरार महोदय को हो सकती है, इस ट्रस्ट का बैंक खाता भी जरूर होगा, इस खाते को संचालन का अधिकार किसको है यह बात भी ट्रेजरार साहब ही जानते होंगे।मंदिर परिसर में कुछ होर्डिंग भी लगवाए गए हैं, कि जिसको दान देना हो कार्यालय में दे और रसीद प्राप्त कर ले।
यह काम जिला प्रशासन व राज्य सरकार का है ,कि वह इस दान की राशि की चोरी पर प्रतिबंध लगाने के लिए क्या कोई ठोस निर्णय लेती हैं , यदि इस मंदिर को राज्य सरकार मां वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर अधीग्रहित कर ले ,और इसका संचालन अपने हाथ में ले ले तो शायद यहां सुविधाए भी बेहतर हो जाएगी, और जो श्रद्धालु यहां धनराशि व आभूषण मां के दरबार में अर्पित करके जाते हैं, वो पैसा मां के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खर्च होगा।
हालांकि उस पैसे में भी जिन भी सरकारी कर्मचारियों को लगाया जाएगा वह भी अपना हिस्सा तो रखेंगे ही , इसका सीधा प्रमाण अभी बद्री केदार मंदिर समिति के एक अधिकारी को निलंबित किए जाने के बाद सामने आ गया है। यह मामला भी कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा ही उठाया गया था , कि बद्री केदार नाथ मंदिर पर भी दान की राशि की खुलकर चोरी हो रही है । जिसका संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच बैठाई और मामला में कुछ सत्यता नजर आती देख प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया गया है। यदि इसी तरीके की जांच हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर की भी हो जाए तो सरकार को बहुत कुछ मसाला मिल जाएगा।ठीक से यदि जांच हो गई तो अरबों का गोल माल सामने आएगा।
यदि सरकार व जिला प्रशासन नहीं चेता तो वह दिन दूर नहीं है जब स्वयं मां मनसा देवी की आंख तिरछी हुई तो मंशा देवी मंदिर के दरबार में आने वाले धन की बंदर बांट करने वालों को बचाने वाला कोई नहीं मिलेगा, उसकी लाठी ऐसी पड़ेगी की आवाज भी नहीं करेगी। और ना उसके यहां कोई सिफारिश चलती है।
