देहरादून ।
एक सर्वे के अनुसार उत्तराखंड में बीजेपी को इस बार चुनाव जीतना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिस तरीके से डैमेज कंट्रोल कर रहे हैं।
उससे कहीं अधिक मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल के मंत्री व अधिकारी अपने कारनामे ऐसे दिखा रहे हैं कि राज्य की जनता बीजेपी से आने वाले चुनाव में कन्नी काट सकती है ।

लेकिन राजनीतिक गलियारों के खिलाड़ी कहे जाने वाले लोगों का मानना है, के उत्तराखंड के अंदर विपक्ष नाम की कोई चीज दिखाई नहीं दे रही है, जिसका फायदा कौन उठाएगा,
बात में दम भी है क्योंकि कांग्रेस को देखा जाए तो कांग्रेस के अंदर तो आपस में ही खींचतान कम नहीं हो रही है ।

लेकिन यह खींचतान अकेले कांग्रेस में हो यह नहीं कहा जा सकता, बीजेपी में भी जमकर एक दूसरे की टांग खींचने में लोग लगे हुए हैं।
कुछ मंत्रियों की कार्यशैली और कुछ अधिकारियों की कार्यशैली से तो बीजेपी के विधायक व बीजेपी के कार्यकर्ता भी संतुष्ट नहीं हैं। हैं।

लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ऐसे मंत्रियों व ऐसे अधिकारियों पर अंकुश लगाने में लाचार दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पूरे राज्य की जनता के बीच जा रहे हैं , और जनता से उसका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं ,लेकिन मुख्यमंत्री के अलावा कोई अन्य मंत्री राज्य के दूरदराज इलाकों में जाने के लिए तैयार नहीं है।

अकेला बोझ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कंधों पर ही दिखाई दे रहा है ,बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष में भी कोई दम दिखाई नहीं दे पड़ता है।
अभी तक जो लग रहा है चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मुख्यमंत्री धामी इस चुनाव को अकेले अपने कंधों पर ही लड़ेंगे, क्योंकि बीजेपी के तमाम शीर्ष नेता भी मुख्यमंत्री व उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यशैली से नाराज हैं।

कुछ नाराज विधायक को व कुछ नेताओं को तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मनाने में कामयाब हो गए हैं, लेकिन अब यह आने वाला चुनाव ही बताएगा की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सभी भाजपाइयो को एकजुट करने में कितनी कामयाबी हासिल हुई है। अंकिता भंडारी प्रकरण भी 2027 के चुनावों में बीजेपी को परेशान करेगा।
हालांकि मुख्यमंत्री ने राज्य से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। जिसमें एक बहुत बड़ा फैसला हरिद्वार नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी द्वारा नगर निगम हरिद्वार को 54 करोड रुपए की चपत लगाने के प्रकरण में कई जांच और विजिलेंस जांच कराने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरुण चौधरी को बर्खास्त करने के लिए केंद्र सरकार को लिख दिया है।

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने बद्री केदार मंदिर में चोरी की बात सामने आने पर वहां के एक अधिकारी को निलंबित भी कर दिया है ,इसके अलावा भी मुख्यमंत्री ने कई ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों को दंडित किया है जो भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं।
विजिलेंस टीम भी उत्तराखंड में अच्छा कार्य कर रही है, लेकिन बावजूद इसके उत्तराखंड से भ्रष्टाचार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है ,यह हम नहीं कह रहे हैं यह बीजेपी के ही और संघ के ही कुछ लोगों का दबी जुबान में कहना है।

विपक्ष का तो काम है ही कि वह सत्ता पक्ष पर आरोप लगाए, लेकिन यहां तो सत्ता पक्ष भी अधिकारियों पर आरोप लगाने से पीछे नहीं है, इसको मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को शीघ्र कंट्रोल करना पड़ेगा

इसके लिए मुख्यमंत्री को कुछ ऐसे अधिकारियों को इधर से उधर करना होगा, जिनकी वजह से मुख्यमंत्री को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर एक IAS साहब तो पूरे राज्य के मालिक ही माने जाते हैं। ये साहब रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आकर चुनाव भी लड़ सकते हैं ,चुनाव में विजय प्राप्त करना तो इनके लिए कोइ बडी बात नही होगी ।

इसकी तैयारी तो इन्होंने अभी से शुरू कर दी है, किसी के विरुद्ध धरना प्रदर्शन कराना हो या किसी को धरने प्रदर्शन की धमकी दिलाना हो उस सब का पूरा प्रबंध साहब के पास रहता है।

