नरेश गुप्ता
राजनाथ सिंह में वह क्षमता है कि वह पूरे देश को एक साथ लेकर चल सकते हैं, राजनाथ सिंह में स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी की छवि दिखाई पड़ती है , लेकिन वह वर्तमान में कुछ बोलते की स्थिति में नहीं है और राजनाथ सिंह जी क्या सत्ताधारी दल का कोई भी मंत्री या सांसद अपना मुंह खोलने की स्थिति में नहीं है,जंतर मंतर पर छात्रों के धरने व छात्रों की पिटाई से बीजेपी के कुछ मंत्री व सांसद भी दुःखी थे लेकिन अपना मुँह खोलने की स्थिति मे नही थे ।
जे पी नड्डा व सिंह ने जिस तरह से इस प्रकरण को निपटाया है उसके लिये इन दोनों ही मंत्रियों को साधुवाद है,छात्रों व विपक्ष की घेराबंदी के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री की कुर्सी छोड तो दी है।लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मंत्री मंडल विस्तार के दौरान धर्मेंद्र प्रधान को किसी बेहतर मंत्रालय की जुम्मेदारी से नवाजा जा सकता है। केवल अगर बोलने का अधिकार है तो वह भारत के गृहमंत्री अमित शाह को है वही निर्णय करेंगे किसको संसद में या राज्यसभा में बोलना है, और क्या वक्तव्य देना है।

उधर यदि माननीय नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री पद से हटते हैं तो वह राष्ट्रपति के अधिकारों में कुछ संशोधन कर राष्ट्रपति के अधिकारों को और अधिक शक्तिशाली बनाएंगे, जिसका संविधान में संशोधन किया जाएगा, उसके बाद नरेंद्र मोदी देश के राष्ट्रपति की कुर्सी पर विराजमान हो सकते हैं। 75 वर्ष की यदि बात करें तो 75 वर्ष मे बाद की पाबंदी तो समाप्त ही हो चुकी है।
