लखनऊ, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को यदि सरकार बनानी है तो घोषणा पत्र में घोषणा करनी होगी के सरकार बनने के बाद गुंडे बदमाशों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा, राज्य की महिलाएं बालिकाएं सुरक्षित निर्भीक निडर होकर आ जा सकेंगी।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार से लोग भले ही खफा हो लेकिन योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली ने उत्तर प्रदेश की जनता को योगी आदित्यनाथ के प्रति एक तरीके से उनका मुरीद कर रखा है, लेकिन राज्य की ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह बेलगाम है यहां तक के किसी मंत्री तक का काम उनके कहने से नहीं होता है,
बिना पैसा दिए कोई कार्य उत्तर प्रदेश में करा पाना असम्भव है, ऐसा नहीं की सारे ही ब्यूरोक्रेट्स एक जैसे हैं इनमें बा मुश्किल 5% ऐसे भी हैं जो इमानदारी से अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा पूर्वक कार्य कर रहे हैं ब्यूरोक्रेसी के ही कारण जनमानस उत्तर प्रदेश में काफी परेशान है खासकर व्यापारी वर्ग किसान वर्ग काफी परेशान है

इन सब बातों का फायदा समाजवादी पार्टी को मिल सकता है लेकिन समाजवादी पार्टी के साथ एक समस्या यह है कि समाजवादी पार्टी के राज्य को जनता गुंडों का राज्य मानती है, अपनी इस छवि को अखिलेश यादव को साफ करना होगा, साथ ही चुनाव से पूर्व राज्य की जनता को अपने घोषणा पत्र में यह विश्वास दिलाना होगी की राज्य के अंदर किसी भी गुंडे बदमाश को किसी तरीके का भी संरक्षण नही दिया जाएगा।

महिलाएं और छात्राएं सुरक्षित महसूस करेगी तभी जाकर अखिलेश यादव को कुछ सीटों का लाभ उत्तर प्रदेश में मिल सकता है, अन्यथा समाजवादी पार्टी की छवि जनता के बीच ठीक नहीं है, रही बात बहन मायावती जी की उन्होंने भी घोषणा कर दी है कि वे अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरेंगी लेकिन बहन जी यह खेल किसके इशारे पर खेल रही है इसको पढ़ा लिखा दलित समाज अच्छी तरीके से जान रहा है।
दूसरी तरफ ओवैसी साहब भी पूरे खिलाड़ी हैं मंच से तो बीजेपी को खूब खरी-कोटी सुनाते हैं लेकिन उनके बारे में भी मुस्लिम समाज धीरे-धीरे समझने लगा है की ओवैसी साहब की करनी और कथनी में कितना अंतर है ।
ले देकर अब कांग्रेस और सपा को ही एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरना होगा तभी उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता समाजवादी पार्टी व कांग्रेस को नसीब हो पाएगा अन्यथा बीजेपी तो है ही।
