
जिलाधिकारी, हरिद्वार
हरिद्वार: अमेरिकन आश्रम भूपतवाला को लेकर चल रहा है घमासान आश्रम की केयरटेकर परमजीत कौर कुछ साधु संतों पर आश्रम कब्जाने का लगाती है आरोप, तो बाबा हठयोगी ने लगाए हैं आश्रम की केयरटेकर पर ही आश्रम की संपत्ति को खुर्द करने के आरोप।
हरिद्वार के दूधाधारी चौक के आसपास अमेरिकन आश्रम की 25 बीघा बेशकीमती जमीन एक विदेशी महिला की है, यह विदेशी महिला करीब एक दशक से हरिद्वार नहीं आई है ,और यहां उक्त महिला ने संपत्ति की देखभाल के लिए परमजीत कौर नामक एक महिला को रखा हुआ है, इस केयरटेकर महिला ने सोलंकी नाम के एक व्यक्ति को पांच बीघा जमीन खेती करने के लिए दे दी जिसका इस महिला केयरटेकर को कोइ अधिकार ही नही है, इस जमीन पर खेती तो नहीं हुई है लेकिन करीब एक दर्जन दुकाने जरूर बनकर तैयार हो गई है।

इन दुकानों का ना तो कोई नक्शा पास हुआ है ना किसी तरीके का इन दुकानों के निर्माण के लिए कोई हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण में नक्शा प्रस्तुत किया गया है ,बिना नक्शा पास कराए बिना हरिद्वार विकास प्राधिकरण में नक्शा प्रस्तुत किए इन दुकानों का निर्माण हो गया है, अब मामला काफी विवादित होता जा रहा है।
बाबा हठयोगी का कहना है कि वह इस संपत्ति को खुर्द नहीं होने देंगे, लेकिन वह इस संपत्ति पर ना तो अपना हक जमा रहे हैं ना कभी उन्होंने अपना हक जमाया है ना इस संपत्ति में से एक इंच जमीन भी यदि ले तो वह गाय का खून पिए लेकिन संपत्ति को खुर्द बुर्द नहीं करने दिया जाएगा या तो क्षेत्र में कोई शिक्षण संस्था यहां पर बनवाने के लिए सरकार से अनुरोध किया जाएगा अन्यथा सरकार इसे राज्य संपत्ति में निहित कर ले तभी जाकर यह मसाला समाप्त होगा।

छेत्र के काफी लोगों का कहना है की इस बेशकीमती आश्रम पर अभी तो मुंह जवानी शीत युद्ध चल रहा है लेकिन मामला ज्यादा लंबा चला तो यहां कोई अप्रिय घटना भी घट सकती है, बाबा हठ योगी का साफ शब्दों में कहना है कि इस संपत्ति पर जिला स्तर के एक भाजपा नेता की निगाह भी बनी हुई है ,और वही नेता इस संपत्ति को कब्जाने की फिराक में है व कुछ कोंग्रेसीयों की निगाह भी आश्रम पर लगी हुई है।आश्रम को लेकर मामला इतना गर्म हो गया है की हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण ने सोलंकी व परमजीत कौर को नोटिस दिया है जिसमें 15 अक्टूबर तारीख लगी हुई है।

उधर चर्चा यह भी है की कुछ साधु संत भी इस संपत्ति पर निगाह गड़ाए हुए हैं, अब यह साधु संत कौन-कौन हो सकते हैं यह शहर के लोग अच्छी तरीके से वाकिफ है ,क्योंकि कुछ साधु संत ऐसे हैं हरिद्वार में जो इस तरीके की संपत्तियों को कब्जाने में माहिर माने जाते हैं, और संपत्तियों के फर्जी कागजात बनवाने में भी यह गेरुवा वस्त्र धारी निपुण समझे जाते हैं,
कई खेल इन्होंने कर भी दिए हैं हम तो यही कहेंगे के जिला अधिकारी हरिद्वार को चाहिए कि वह राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर यह आग्रह करें कि यह संपत्ति राज्य सरकार में निहित कर ली जाए।
