
उत्तराखंड, हरक सिंह रावत व जैनी प्रकरण को डीएनए टैस्ट ही साबित कर सकता है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ, क्योंकि दोनों ही अपने आप को सही बता रहे हैं जैनी का कहना है कि उनका बेटा हरक सिंह रावत की संतान है, उधर हरक सिंह रावत कह रहे हैं मैं जैनी से कभी मिला ही नही इसलिए डीएनए टैस्ट दूध का दूध और पानी का पानी कर सकता है।
उत्तराखंड की राजनीति में इस समय हरक सिंह रावत व जैनी को लेकर पूरे राज्य में अफवाहों का बाजार गर्म है, उधर यह बात भी आम चर्चा का विषय बनी हुई है की जैनी को अब 23 वर्ष बाद यह बात क्यों याद आई के उसे देहरादून चलकर हरक सिंह रावत से अपने बेटे को अपना नाम देने की बात करनी चाहिए।

हालांकि जैनी ने देहरादून जाकर हरक सिंह रावत से तो कोई सम्पर्क नहीं किया, सीधे प्रेस में जाकर उन्होंने इस प्रकरण को सीधे-सीधे जनता के बीच पहुंचा दिया कि मेरे बेटे का पिता हरक सिंह रावत है मुझको अपने बेटे के पिता का नाम चाहिए, हरक सिंह रावत मताधारी देवी की सौगंध खा रहे हैं और अपने माता-पिता की सौगंध खा रहे हैं कि उनका जैनी से कभी कोई संबंध या संपर्क ही नहीं हुआ है ,तो बालक होने का तो प्रश्न ही पैदा नहीं होता।

ऐसी स्थिति में अब उत्तराखंड पुलिस को इस महत्वपूर्ण समस्या के समाधान के लिये न्यायालय से जैनी के पुत्र व हरक सिंह रावत के डीएनए टेस्ट की अनुमति प्राप्त कर , हरक सिंह रावत व जैनी के बेटे का डीएनए टेस्ट कराना होगा , डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट ही बता सकेगी के क्या वाकई में हरक सिंह रावत ही जैनी के बेटे के पिता हैं या जैनी झूठ बोल रही है।
