रैली के माध्यम से गुरु-शिष्य संस्कृति को पुनः जीवंत करने का आह्वान

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिवसीय पावन गुरुपूर्णिमा महापर्व का आज विधिवत शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन जनजागरण रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों के श्रद्धालु, -साधकगण, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एवं शांतिकुंज के कार्यकर्त्ता शामिल हुए। रैली गेट नंबर २ से प्रारंभ होकर देसंविवि, हरिपुर कलॉ होते हुए लगभग तीन किलोमीटर की परिक्रमा कर गुरुसत्ता की पावन समाधि पर आकर संपन्न हुई।

रैली के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा की पुनर्स्थापना तथा अपने सद्गुरु के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया गया। गुरुसत्ता की समाधि पर सामूहिक आरती, जयघोष एवं संकल्प के साथ रैली का समापन हुआ।

इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या व श्रद्धेया शैलदीदी ने अपने संदेश में कहा कि सबल सद्गुरु ही अपने शिष्य को प्रकाश की ओर ले जाने वाला पथप्रदर्शक होता है। वह उसके भीतर छिपी संभावनाओं को जाग्रत कर श्रेष्ठ मानव बनाता है। गुरु दीक्षा संगोष्ठी में वक्ताओं ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सद्गुरु शिष्य को जीवन की सही दिशा देकर उसे आत्मिक एवं सामाजिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।

जैसे ऋषि वाल्मीकि ने श्रीराम को, संदीपनि मुनि ने श्रीकृष्ण को जीवन विद्या से अनुप्राणित किया, वैसे ही आज के युग प्रवर्तक परम पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा जी ने करोड़ों परिजनों के जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध किया है।
सायंकाल एक शाम गुरुवर के नाम कार्यक्रम के अंतर्गत गायत्री विद्यापीठ के बच्चों एवं शांतिकुंज कार्यकर्त्ताओं ने गुरु परंपरा पर आधारित भजन, गीत व सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जो दर्शकों के लिए अत्यंत भावविभोर करने वाली रहीं।

गुरुपूर्णिमा पर्व के अंतर्गत आगामी दो दिनों तक विशेष गायत्री महायज्ञ, गुरु दीक्षा समारोह, अखण्ड गायत्री साधना एवं प्रेरणादायी विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। देश-विदेश से पधारे श्रद्धालु इस पावन अवसर पर सहभागिता कर जीवन को नयी दिशा देने हेतु प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।

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