हरिद्वार । एक जमाने के नाम चीन सेठ, समाजसेवी व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पारस कुमार जैन जिन्होंने तिल तिल करके अपनी ईमानदारी और मेहनत के साथ संपत्ति एकत्र की थी वह संपत्ति पारस कुमार जैन व उनकी पत्नी मीना जैन के निधन के बाद बिक गई है।
जिस तरीके से पारस कुमार जैन का नाम देश रक्षक से उनके परिजनों ने मिटाकर उनकी संपत्ति को बेच दिया है। उसको देखकर यह बड़े बुजुर्गों की कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है।
अब इस संपत्ति को लेकर पारस कुमार जैन के सबसे बड़े पुत्र स्वर्गीय मनोज जैन के पुत्र व मनोज जैन की पुत्री के बीच संपत्ति को लेकर हरिद्वार न्यायालय में मामला पहुंच गया है ।मनोज जैन की पुत्री व मनोज जैन के पुत्र में करोड़ों की संपत्ति को लेकर पहले से ही मनमुटाव चल रहा था ।लेकिन अब यह मामला न्यायालय में चला गया है

देश रक्षक औषधालय नाम की यह संपत्ति शहर के ही एक प्रॉपर्टी डीलर को बेच दी गई है। लेकिन अभी तक इस प्रॉपर्टी का लैंड यूज भी चेंज नहीं हुआ है। अभी भी यह प्रॉपर्टी इंडस्ट्री यानी औद्योगिक भूमि के रूप में ही सरकारी खातों में दर्ज है।
जाहिर है करोड़ों रुपए की इस भूमि पर कोई उद्योग तो लगाया नहीं जाएगा, यहां प्लाटिंग कर कालोनी काटी जाएगी, और इसके लिए जमीन का लैंड यूज चेंज करवाना अनिवार्य होगा, तभी जमीन के प्लाटों के नक्शे पास हो सकेंगे ,फिलहाल यह मामला न्यायालय में होने के कारण इसमें थोड़ा विवाद पैदा हो गया है, मनोज कुमार जैन की पुत्री हांगकांग में रहती है ,और पुत्र हरिद्वार में ही रहते हैं ,अब देखना है यह मामला क्या गुल खिलाता है।
जिस प्रोपर्टी डीलर ने यह करोड़ो की भूमि खरीदी है, उसके साथ एक नेता जी की पार्टनर शिप भी इस भूमि में बताई जाती है।क्योंकि इतनी मोटी रकम की सम्पत्ति अकेले खरीदना तो प्रोपर्टी डीलर साहब के बस से बाहर की बात है।
