देहरादून । उत्तराखंड की राजनीति में विगत एक सप्ताह से भूचाल सा आया हुआ है । और ये भूचाल बीजेपी के कुछ अय्याश खददरधारियों की करतूतों के कारण आया हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर तीर्थ नगरी हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र से एक बार विधायक रह चुके सुरेश राठौड़ व उनकी महिला मित्र या यह कहें के तथाकथित पत्नी के बीच जो वार्ता वायरल हो रही है या नए-नए पोर्टल्स पर यह सारी चीज दिखाई जा रही हैं उन्हें देखकर आम जनता बहुत शर्म महसूस कर रही है।

दुष्यंत गौतम
नंगई की हद,ना बच्चो का ख्याल न महिलाओं माँ बहनों का ख़्याल।
इन दोनों ने अपनी हरकतों को इस कदर नंगई तक पहुंचा दिया है। की इनको यह तक एहसास नहीं है कि राज्य में महिलाएं भी रहती है, बच्चे भी रहते हैं महिला अधिकारी भी रहती हैं, महिला पॉलिटिशियन भी रहती हैं ,और तमाम बुजुर्ग लोग भी इन पोर्टल्स को अब देखते है ।यह लोग इन दोनो की इन करतूत को देखकर क्या सोचते होंगे। इन्हें इस बात का कोई एहसास नहीं है ठीक है, सुरेश राठौड़ ने किस समय या क्यों उर्मिला से ये बातें की है कि दुष्यंत गौतम गट्टू जिनको बताया जा रहा है। गौतम साहब जो बीजेपी के उत्तराखंड के प्रभारी है । और अब तो अजय नाम भी आ गया है यह संघ के बहुत ही वरिष्ठ नेता है। और उत्तराखंड में तो इनकी तूती बोलती है। यह सारे नाम सुरेश राठौड़ ही ले रहे हैं। और कोई नहीं ले रहा है। रही बात सुरेश राठौड़ और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के द्वारा कांग्रेस पर आरोप लगाने का की उर्मिला कांग्रेस की गोदी में बैठ कर बेबुनियाद आरोप लगा रही है।

भट्ट जी क्या कॉंग्रेस ने आपसे कहा था की आप प्रेस करो।
भट्ट जी क्या कांग्रेस ने आपसे कहा था कि आप इस प्रकरण को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करें। जबकि आप अच्छी तरीके से उर्मिला को जानते थे। और उसकी सारी बातों को उसके सारे रवैय्ये को की वो किस हद तक जा सकती है । तो फिर आपने क्यों प्रेस कॉन्फ्रेंस करी और क्यों अपना मुंह खोला और भी तो बहुत सारे नेता थे। और नेताओं मंत्रियों से प्रेस द्वारा इस प्रकरण को पूछा जा रहा है ।कोई नहीं बोल रहा है। सब होठ सिले हुए हैं। सबको पता है की सच्चाई क्या है। तो फिर आप ही को क्या खाज हुई की आप प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और प्रेस कांफ्रेंस करने के बाद आपको अपनी हैसियत का पता चल गया।

त्रिवेन्द्र सिंह रावत
सुरेश राठौड़ ने अजय कुमार का नाम भी खोल दिया,जो अब तक इशारों में ही चल रहा था।तिरवेन्द्र सिंह रावत ने निष्पक्ष जांच की मांग।
भट्ट जी आपके साथ-साथ अब यह बात, जो अभी तक अजय कुमार के बारे में केवल और केवल एक संघ के नेता के नाम के रूप में ली जा रही थी। अब वह साफ-साफ खुलकर सामने आ गई है। इस पूरे प्रकरण को लेकर हरिद्वार के बीजेपी के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत जो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। और बहुत ही ईमानदार और सज्जन मुख्यमंत्री में उनकी गिनती होती है। उन्होंने भी साफ-साफ कह दिया है, कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी व्यक्ति इस प्रकरण , अंकित मर्डर केस में शामिल हो वह चाहे कितने ही बड़े लोग हो उनको सजा मिलनी चाहिए।

महेन्द्र भट्ट
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष महोदय भी दिल्ली में जाकर ल उन्होंने भी प्रेस कर दी कि इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। सीबीआई जांच होकर होगा क्या यह बात सुरेश राठौड़ अपनी भाषा में अपने भाषण में अपनी बातों में जो बातें वह उर्मिला के साथ कर रहे हैं। उनमें साफ कर चुके हैं , की सीबीआई कुछ नहीं करेगी, तो फिर सीबीआई की मांग करने से क्या फायदा है। इस समय पार्टी मुसीबत के दौर से गुजर रही है उसका क्या नतीजा 2027 के चुनाव में निकलेगा यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन फिलहाल बैठे-बैठे बीजेपी के लिए एक मुसीबत जरूर खड़ी हो गई है।इस मुसीबत की जड़ पूर्व विधायक जी ही दिखाई पड़ रहे है। यह उर्मिला नाम की महिला जो बातें कर रही है उन बातों में कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ तो सच्चाई होगी ही क्योंकि यह बातें उर्मिला से सुरेश राठौड़ फोन पर कर रहे हैं । सुरेश राठौर की आवाज सब लोग जानते हैं, भले ही सुरेश राठौड़ कुछ भी कहते रहें, की आवाज मेरी नही है। इन बातों को भांपते हुए और भी बीजेपी के नेता चुप्पी साधे हुए हैं।
भट्ट जी मुँह बन्द रखने में ही आपका और पार्टी का फायदा है।अन्यथा छिछालेदर तो चल ही रही है।
महेंद्र भट्ट जी आप इतना मत बोलो की जो गंदगी के छींटे कंकड़ फेंकने के बाद आपके कुर्ते पर भी आए, और आए क्या आ ही गए हैं। और आप ही की इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद अजय कुमार का नाम भी सार्वजनिक हो गया है ।अन्यथा अभी तक अजय कुमार का नाम केवल संकेत में ही चल रहा था । की अंकिता मर्डर केश में संघ के एक बड़े नेता भी शामिल है ।रिजॉर्ट तो था ही वीआईपीयो की अय्याशी का अड्डा, ये वीआईपी ही तो रिजॉर्ट मालिक को करोडों के वारे न्यारे सरकार की योजनाओं के जरिये करवाते थे।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि उस रिसोर्ट में केवल और केवल अय्याशी का धंधा होता था । बीजेपी के असरदार नेता वहां अय्याशी करने ही जाते थे। ऐसे ही नहीं इस रिसोर्ट के मालिक जिन्होंने एक झटके में दर्जा धारी राज्य मंत्री का पद झटक लिया था। और दर्जदारी राज्य मंत्री जी के बेटे बिल्कुल बेलगाम हो गए थे । यही बेलगामी उनको तो जेल पहुंचा चुकी है, लेकिन एक पहाड़ की मासूम कन्या अंकिता भंडारी जो सामान्य परिवार की थी। वह बेचारी नौकरी करने के लिए अपने मां-बाप का पेट पालने के लिए रिजॉर्ट आई थी ।उसे नहीं पता था कि उसकी यहां पर इज्जत भी सुरक्षित नहीं रहेगी। जिंदा गोश्त के शौकीन भेड़िये उसे नोच डालेंगे, हार कर उसने मौत को खुद गले लगाया या उसकी हत्या की गई यह तो स्पष्ट नहीं है। लेकिन आज अंकित भंडारी इस दुनिया में नहीं है ।उसके माता-पिता पर क्या गुजर रही होगी इसको सोचते वाला कोई नहीं है।
The post पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ व उर्मिला के बीच चल रही कुत्ता फजिती ने उत्तराखंड की राजनीति में जहां उबाल लाकर रख दिया है ।वहीं आम जनमानस इनकी फजियत को देखकर खुद यह सोचने पर मजबूर हो रहा है क्या उत्तराखंड की राजनीति का नाम यही है। first appeared on kamakhyanews.
