देहरादून । उत्तराखंड में 2022 में हुए अंकिता भंडारी मर्डर केस को लेकर राज्य सरकार के सारे गुणा भाग व सेटिंग फेल होती दिखाई दे रही हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में इस प्रकरण को लेकर बढ़ रहे जन आक्रोश को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश तो कर दी है लेकिन अंकिता भंडारी के पिता का कहना है।

की उन्होंने जिस तरह की जांच सीबीआई से कराने की बात कही थी उसके बारे में मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा है ।केवल सीबीआई जांच कराने की बात कही है, जबकि इस सीबीआई जांच से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है,
अंकिता भंड़ारी की हत्या वीआईपीयो की वजह से ही हुई है।उनको बचाने के लिए सरकार लगा रही है एड़ी चोटी का जोर।

अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी का कहना है ,उनकी मांग है कि उनकी पुत्री की हत्या की जांच सीबीआई जांच से तो हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में अब देखना यह है।
कि यह मामला और कितना आगे तक जाता है, और इस प्रकरण को मुख्यमंत्री किस तरीके से सुलझाते हैं अंकित भंडारी के पिता का कहना है कि मेरी पुत्री की हत्या वीआईपी के कारण ही हुई है ,और इसकी निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में ही कराए जाने से ही हो सकती है।

अंकिता भंड़ारी के पिता की बात में नजर आ रहा है दम
वीरेंद्र भंडारी जी की मांग भी कुछ उचित लगती है, क्योंकि सीबीआई जांच के प्रकरण को सुरेश राठौड़ और उर्मिला के द्वारा हुई वार्ताओं में जो ऑडियो और वीडियो सामने आए हैं उनमें उर्मिला सुरेश राठौड़ से साफ-साफ कहती है कि यदि किसी वीआईपी का नाम इस अंकिता मर्डर में है ,तो इसकी सीबीआई जांच क्यों नहीं हो रही है।
तो सुरेश राठौड़ साफ-साफ कह रहे हैं कि सीबीआई जांच क्या करेगी सीबीआई जांच कैसे किसी महामंत्री की जांच करेगी सरकार का मामला है ,सरकार जो चाहती है वही होता है, तो बात तो सही है कि सीबीआई की जांच में होगा क्या, लेकिन सुरेश राठौड़ तो अपनी सभी बातों को नकार रहे है, कह चुके हैं कि मैने तो कहा ही नहीं है ,इसको तो बनाकर और जाने किस किस तरीके से पेश कर दिया गया है।

अब यह फोरेंसिक जांच के लिए उनकी आवाज जाएगी उसमें टाइम लगेगा मतलब यह मामला भी जैसे पिछली बार 2022 में वीआईपीयो की जांच की मांग को लेकर जांच ठंडे बस्ते में चली गई थी , ऐसे ही अब 4 साल बाद फिर यह मामला जांच को लेकर ठंडे बस्ते में ही चला जाएगा। या जांच धीरे-धीरे कछुआ चाल चलती रहेगी,
किसी भी वीआईपी का होना कुछ नही, मुख्यमंत्री चाह कर भी कुछ नही कर पा रहे है।
ना तो किसी वीआईपी का कुछ होना है, और न हीं अंकिता भंडारी मर्डर केस खुलकर ठीक से सामने आना है ,क्योंकि जिस तरह के दांव पेंच इस केस को लेकर चले जा रहे हैं, उससे तो यही प्रतीत होता है, बाकी यदि राज्य की जनता ने यह ठान लिया कि वह जांच तो कायदे से करा कर ही रहेगी, और दोषियों को दंडित भी कराया जाएगा, तो शायद अंकिता भंडारी को न्याय मिल सके, क्योंकि जनता के आगे सत्ता भी बेबस होती है।

लेकिन जनता भी दृढ़ता के साथ अपनी उचित मांगों को मनवाने के लिए संकल्प बंद रहे ,तभी सही परिणाम सामने आ सकते हैं, चर्चा तो यह भी है की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तो इस प्रकरण की जांच ठीक तरीके से करवाना चाहते हैं ,लेकिन उनके ऊपर दाएं बाएं ऊपर नीचे का इस कदर दबाव है , वे खुद सही निर्णय लेने में असहाय दिखाई पड़ रहे हैं।कल तक काफी शोर शराबा कर रहीं उर्मिला जी भी अब बिल्कुल शांत हो गई है,
