देहरादून । अंकिता भंडारी मर्डर कैसे को भले ही पुलिस या कुछ सत्ताधारी दल के नेता आत्महत्या करार देने पर तुले हो लेकिन राज्य की आम जनता खासकर महिलाएं अंकिता भंडारी के मामले में उसकी हत्या होना ही मान रहे हैं।
जिसके लिए राज्य की जनता व अंकिता भंडारी के माता-पिता ने सीबीआई जांच की मांग की थी धामी सरकार ने सीबीआई जांच तो शुरू करा दी है ।लेकिन एक अनाम से व्यक्ति की मांग पर यह जहां शुरू कराई गई है।

आम जनता का व अंकिता भंडारी के माता-पिता का कहना है कि जिस व्यक्ति का इस केस से कोई लेना-देना ही नहीं है उसके कहने पर सीबीआई जांच शुरू कराई जा रही है, जबकि उसके माता-पिता की राज्य सरकार कुछ नहीं सुन रही है।
अब देखना यह है की काफी समय बीत चुका है लेकिन अंकित भंडारी का भूत सत्ताधारी दल के नेताओं का पीछा नहीं छोड़ रहा है ।जिन दो नेताओं पर अंकिता भंडारी के साथ जबरन रिश्ते बनाने का आरोप है उनमें से एक साहब तो शायद उत्तराखंड से पलायन कर गए हैं ।लेकिन एक महोदय पुनः मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक के कार्यक्रमों में दिखाई देने शुरू हो गए हैं।

इसको लेकर भी आम जनता के अंदर सरकार को लेकर आक्रोश बना हुआ है। लेकिन पता नहीं क्या कारण है की धामी जी इन महोदय से किनारा क्यों नहीं कर पा रहे हैं। जबकी ये जनाब तो कंगाल से करोडों के वारे न्यारे कर चुके है, धामी जी को चाहिए कि वह इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराते हुए , जिन लोगों के ऊपर भी इस प्रकरण के आरोप है उनसे किनारा कर लेना चाहिए ।उसी में राज्य सरकार की और भविष्य में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल की भलाई है।
अन्यथा इस राज्य की महिलाओं के बूते ही यह राज्य बना था, और महिलाएँ ही इस बार अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के मूड में दिखाई दे रही हैं, जिसको शायद राज्य सरकार या राज्य सरकार की गुप्तचर एजेंसियां पहचान नहीं पा रही हैं।
