वन विभाग को चकमा देकर पहुंचा अदालत
हरिद्वार। उत्तराखंड के चर्चित बाघ शिकार प्रकरण में फरार चल रहा मुख्य आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां आखिरकार सोमवार को रोशनाबाद स्थित कोर्ट में सरेंडर करने में सफल हो गया। वन विभाग की टीम पिछले कई दिनों से उसकी तलाश में जुटी हुई थी और कोर्ट परिसर में भी उसकी घेराबंदी की गई थी, लेकिन अंतिम समय में हुए घटनाक्रम के बीच आमिर हमजा अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने में कामयाब रहा। अब वन विभाग उसे रिमांड पर लेकर मामले के कई अहम राज उजागर करने की तैयारी कर रहा है।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे आमिर हमजा अपने अधिवक्ता के साथ रोशनाबाद कोर्ट परिसर पहुंचा और एक वकील के चैंबर में बैठ गया। वन विभाग की टीम पहले से ही उसकी तलाश में कोर्ट परिसर के आसपास मौजूद थी। जैसे ही वनकर्मियों को उसके वहां होने की सूचना मिली, उन्होंने उसे हिरासत में लेने का प्रयास किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस दौरान वकीलों और वन विभाग की टीम के बीच तीखी नोकझोंक हुई। वकीलों ने अदालत परिसर के भीतर आरोपी को पकड़ने का विरोध किया, जिसके चलते माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। हंगामे के बीच आमिर हमजा अदालत में पेश हुआ और विधिवत सरेंडर कर दिया। इस तरह वन विभाग की टीम अंतिम क्षणों तक प्रयास करने के बावजूद उसे सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकी।
18 मई से फरार था मुख्य आरोपी
गौरतलब है कि हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट क्षेत्र में दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया था। जांच में खुलासा हुआ कि बाघों को जहरीला पदार्थ खिलाकर मार दिया गया था। बाद में जंगल से दोनों बाघों के शव बरामद किए गए, जिससे वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
मामले की जांच के दौरान वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए आलम उर्फ फम्मी, आशिक, जुप्पी और यूसुफ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि जांच एजेंसियों के अनुसार पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड आमिर हमजा उर्फ मियां था, जो 18 मई से लगातार फरार चल रहा था और वन विभाग की टीम को चकमा दे रहा था।
जहर डालने से लेकर सबूत मिटाने तक का आरोप
वन विभाग की जांच में आमिर हमजा की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि मृत भैंस पर जहरीला पदार्थ डालकर बाघों को मारने की योजना उसी ने बनाई थी। इतना ही नहीं, बाघों की मौत के बाद उनके शरीर के अंग काटने और साक्ष्य छिपाने में भी उसकी प्रमुख भूमिका सामने आई है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि बाघों के कटे हुए पैर और वारदात में इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार अभी तक बरामद नहीं हो सके हैं। इन महत्वपूर्ण साक्ष्यों की बरामदगी और पूरे षड्यंत्र की परतें खोलने के लिए आमिर से गहन पूछताछ बेहद जरूरी मानी जा रही है।
