महाकुंभ के संगम तट के पास रात एक बजे मची भगदड़

भगदड़ में दो दर्जन मौतों की पुष्टि. अस्पतालों में सैंकड़ों घायल भर्ती।
स्नान आगामी आदेशों तक रोक दिया गया है।

कुंभ के इतिहास में नौटंकी सरकार के चलते पहली बार होगा कि मौनी अमावस्या पर स्नान नहीं होगा।

तथाकथित भविष्यवक्ता धीरेंद्र ने कहा है कि जो कुंभ नहीं आएगा वो देशद्रोही कहलाएगा। अब देशद्रोह के सर्टिफिकेट बांटने वाले ऐसे नमूनों पर भगदड़ और हत्या का केस क्यों नहीं चलाना चाहिए? पर्चा पढ़ने वाले इस नमूने को भगदड़ का पता क्यों नहीं था?

दूसरी तरफ़ महामंडलेश्वर बोल रहे हैं कि आजम जैसी व्यवस्थाएं अबकी बार नहीं है सब तरफ अव्यवस्थाएं हैं। पर उधर पंद्रह दिन से योगी और उनके गण शोर मचा रहे हैं कि ऐसा कुंभ और ऐसी व्यवस्था आज तक नहीं हुई और वे बारबार पिछले कुंभ की ‘अव्यवस्थाओं’ के लिए आजम को गाली धर्म देकर अपनी भड़ास बाहर निकाल रहे हैं।

हकीकत में जितनी खबरें आ रही हैं उससे ज्यादा अव्यवस्थाएं और लूट का अड्डा ये कुंभ है। अभी पांच दिन पहले ही मेले के तंबुओं में आग लगी थी जो कि गीताप्रेस के पंडाल से शुरू होकर 60+ पंडालों को भस्म कर दिया।
एक एक कमरे की एक रात रूकने की रेट 40 हजार तक है एक किमी तक के आटो रिक्शा का किराया 300-400 रूपये तक है।
कुंभ क्षेत्र में योगी मंत्रियों ने पहले ही जगहें दुकान स्टाले खुद रोक ली और अब वे ही छोटे दुकानदारों आदि को लाखों रूपये वसूल कर जगह अलॉट कर रहे हैं।

देश के तमाम शहरों से आने वाली फ्लाईटों का किराया दिल्ली-लंदन से भी ज्यादा है तो सरकार जिस चीज को कहते हैं वो देख क्या रहे हैं? या आपदा में अवसर का लाभ उठाना चाहिए, ये भी किसी का वचन है?

जहां रोज पचास लाख लोगों की भीड़ हो वहां अव्यवस्थाएं लाजिमी हैं पर मेला अभी शुरू हुआ है और एक महीना बाकी पड़ा है वहां दम साधे हालातों को वॉच करना चाहिए और सरकार को लगातार सक्रिय रहना चाहिए पर योगी मंत्रिमंडल रोज नहान की क्रीड़ा करने आ जाते हैं और वीआईपी ट्रीट के चलते हालात बिगड़ते हैं। धर्म आजकल प्रदर्शन और फैशन की चीज बन गया है।

धर्म को इवेंट और तीर्थस्थलों को पर्यटन बना देने वाली सरकार और भगदड़ में मरे हुए शहीदों को श्रद्धांजलि।

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