जनपद में प्रदीप कौर के पति द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में जहां सरकार और पुलिस की कार्रवाई से पत्नी एवं पूरा परिवार संतुष्ट नजर आ रहा है, वहीं लगातार सामने आ रही बयानबाज़ी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि इस दुख की घड़ी में उन्हें न्याय प्रक्रिया पर भरोसा है और वे किसी प्रकार के दबाव या आंदोलन की आवश्यकता महसूस नहीं कर रहे।
परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, पुलिस द्वारा की जा रही जांच और प्रशासन की संवेदनशीलता से वे संतुष्ट हैं। इसके बावजूद कुछ लोग लगातार इस मामले को उछालते हुए बयान दे रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवार मानसिक रूप से परेशान हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पीड़िता स्वयं सरकार और पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट है, तब आखिर बार-बार बयानबाज़ी की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या इस संवेदनशील मामले को किसी राजनीतिक एजेंडे या फिर किसी विशेष पोस्टिंग व लाभ की साजिश से जोड़ा जा रहा है?
परिजनों का साफ कहना है कि वे शांति से इस कठिन समय से गुजरना चाहते हैं और किसी भी तरह की राजनीति या बाहरी हस्तक्षेप से दूर रहना चाहते हैं। उनका मानना है कि दुख की इस घड़ी में सहानुभूति और संवेदना की आवश्यकता है, न कि ऐसे बयान जो मामले को भटकाने का काम करें।
अब यह चर्चा आम हो चली है कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन लोग हैं जो पीड़ित परिवार की संतुष्टि के बावजूद माहौल को गरमाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या वाकई कोई इस दुखद घटना को अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने या निजी हित साधने का माध्यम बना रहा है?
यह सवाल न केवल प्रशासन बल्कि समाज के सामने भी खड़ा है—कि क्या किसी परिवार के दर्द को भी साजिश और स्वार्थ की भेंट चढ़ाया जाएगा?
