हरिद्वार। नगर निगम की है, यह संपत्ति इस संपत्ति पर कुछ लोगों ने किया हुआ था कब्जा ,अभी भी एक छोटा मंदिर बनाकर जिस तरीके से कब्जे करने की हरिद्वार में प्रथा है, ठीक उसी तरीके से एक मंदिर इस करोड़ की भूमि पर भी बनाया गया है।

इस मंदिर को सील करने में नगर निगम के कर्मचारियों को काफी दिक्कत आई है ,हालांकि नगर निगम के कर्मचारी आज पुलिस फोर्स लेकर रामलीला भवन पहुंच गए थे ,और उन्होंने वहां मौजूद सभी कमरों को सील करने के साथ-साथ बाकी सारी भूमि अपने कब्जे में ले ली है, लेकिन अभी मंदिर का क्या किया जाए इसको लेकर अधिकारी आपस में विचार विमर्श कर रहे हैं, उच्च अधिकारियों से भी इस विषय पर बातचीत की जा रही है।

यह 50 करोड़ से अधिक की भूमि एक खद्दरधारी नेताजी के इशारे पर कब्जाई गई थी।
यह 50 करोड़ से अधिक की भूमि एक खादर धारी नेताजी के इशारे पर क्षेत्र के ही कुछ लोगों ने कब्जा रखी थी, और इस भूमि पर एक मंदिर स्थापित करने के साथ-साथ आपस में ही मुकदमे बाजी भी शुरू कर दी थी ,इस भूमि पर पहले भी दो बार सील लगाई जा चुकी है, लेकिन दबंग लोगों ने इस शील को भी तोड़ दिया था।
और यहां पर बाकायदा कारोबार चल रहा था, लेकिन मीडिया में काफी उछलने के बाद नगर निगम ने अब इस भूमि को पुनः अपने नियंत्रण में ले लिया है हालांकि नगर निगम के कर्मचारी चार दिन पहले भी भूमि पर कब्जा करने के लिए गए थे। लेकिन उस दिन एक विवाह समारोह का कार्यक्रम वहां पर चल रहा था ,इसलिए विवाह समारोह में कोई विघ्न न पड़े, नगर निगम के कर्मचारी वापस लौट आए थे, और 6 तारीख तक का समय देकर आए थे , की 6 दिसम्बर को हम आएंगे और 6 तारीख को जगह खाली मिलनी चाहिए ।

आज नगर निगम के कर्मचारी भूपत वाला की इस बेश कीमती जमीन का कब्जा लेने के लिए पुलिस को साथ लेकर पहुंच गए थे। लेकिन अभी एक मंदिर जो है उस पर कब्जा नहीं किया जा सका है। और यदि उस मंदिर पर कब्जा नही भी किया जाए । क्योकी मंदिर पर आसपास के लोग पूजा करते हैं तो इससे कोई ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है। बाकी जमीन जो है ,वह तो कम से कम नगर निगम के पास आ गई है। अब देखना यह है की नगर निगम की सील कब तक लगी रहती है।

