देहरादून । अंकिता भंड़ारी का जिन्न तीन वर्ष बाद फिर बोतल से बाहर आ गया है।जो कुछ न कुछ करके मानेगा।
विगत एक सप्ताह पूर्व से अधिक भारतीय जनता पार्टी के हरिद्वार के ज्वालापुर से विधायक रह चुके सुरेश राठौड़ व उनकी तथा कथित पत्नी उर्मिला के बीच जिस तरीके की बातें ऑडियो वीडियो के माध्यम से वायरल हुई है उनको देखकर आम जनमानस तो इस राजनीति को देखकर सर झुका ही रहा है। लेकिन 3 वर्ष पुराने अंकिता भंडारी मर्डर केस का जिन्न फिर से बोतल से बाहर आ गया है ।
और अंकित भंडारी का यह जिन्न राज्य सरकार को परेशानी में डाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी के दो वरिष्ठ पदाधिकारीयो तक जिनमे एक संघ से जुड़े हुए हैं। और एक बीजेपी के बड़े नेता हैं। जिनके नाम लेकर सुरेश राठौड़ ने इन दोनों पर ही जिनके नाम दुष्यंत गोतम व अजय कुमार है .इन पर आरोप लगाए हैं कि यह दोनों ही अंकित भंडारी के मर्डर के जिम्मेदार हैं क्योंकि जिस रिजॉर्ट पर अंकित भंडारी काम करती थी ।वह रिजॉर्ट भी एक दर्जाधारी राज्य मंत्री के पुत्र का रिजॉर्ट है.

सभी सुविधाएं रिजॉर्ट पर थी उपलब्ध.
रिजॉर्ट पर ही वीआईपीयो को सभी तरीके की सुविधा उपलब्ध कराई जाया करती थी ।सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कभी क़भी लड़कियां न मिलने पर रिसोर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी को ही इन हवस के पुजारीयो के सामने परोस दिया जाता था। सुरेश राठौर की माने तो अंकिता भंडारी ने दुष्यंत के साथ हम बिस्तर होने से मना कर दिया था।

जिसकी वजह से अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई या उसने स्वयं आत्महत्या की जब यह बात आम जनमानस के सामने आई। और यह ऑडियो वीडियो वायरल हुई तो उत्तराखंड राज्य की ही नहीं तमाम देशभर की महिलाओं ने व अन्य कई राजनीतिक पार्टी के नेताओं ने बीजेपी की सरकार के इन वरिष्ठ नेताओं की जमकर छिछालेदर की.

कामाख्या न्यूज ने पहले ही बता दिया था. की यह प्रकरण महिलाओं के हाथों में जायेगा और महिलाएं इसको लेकर आंदोलन कर सकती है.
कामाख्या न्यूज़ ने इस प्रकरण के शुरू होते ही बता दिया था कि जिस तरीके से महिलाओं के बल पर यह राज्य बना है ।और महिलाओं के बल पर बने इस राज्य की मौज कांग्रेस व बीजेपी के नेता उड़ा रहे हैं ।वहीं महिलाएं इस अंकित भंडारी केस को लेकर सड़कों पर उतर सकती हैं और यह महिलाएं जब कुर्सी पर बैठा सकती हैं,तो कुर्सी से उतार भी सकती हैं। लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं गया इन महिलाओं की मांग केवल इतनी है ।

कि इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाए। लेकिन राज्य सरकार सीबीआई जांच कराने की बजाय अपने कुछ मंत्रियों या बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वयं ही अपने वक्तव्य दे रहे हैं जो आग में घी का काम कर रहे हैं ,कल 4 जनवरी को राज्य की महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास का घेराव करने की घोषणा की है ।और आम जनता से भी आवाहन किया है की अंकित भंडारी को न्याय दिलाना है इसीलिए राज्य सरकार को हटाना है ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह
अब देखना यह है कि कल 4 जनवरी को इन महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान क्या देखने को मिलता है शांतिपूर्वक ये प्रदर्शन निपट जाता है ,या महिलाओं पर भी सरकार कोई कार्यवाही करने के मूड में आ सकती है, क्योंकि ऐसा बिल्कुल दिखाई नहीं पड़ रहा है की मुख्यमंत्री इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराने के लिए राजी हो जाएंगे। लेकिन यदि सीबीआई जांच के लिए मुख्यमंत्री राजी हो भी जाते हैं. तब भी सुरेश राठौड़ का तो यही कहना है कि अगर सीबीआई जांच होगी भी तो उस जांच में भी कुछ नहीं होगा।
क्योंकि सीबीआई भी तो सरकार के ही हाथ में है। यह बातें कोई और नहीं कह रहा है ।बीजेपी के पूर्व विधायक रह चुके जो कि अब निष्कासित है पार्टी से ,उनका कहना है और यह बातें उनकी बाकायदा वायरल हो चुकी है बावजूद इसके पुलिस और सरकार सबूत मांग रही है।
अरे भाई सबूत देगा कौन ,सबूत एकत्र करना सरकार का काम है ,या सरकार के कारिंदों का है जिस समय यह ऑडियो वीडियो वायरल हो रही थी, तो क्या सरकार के मंत्रियों राज्य सरकार के पुलिसकर्मियों अधिकारियों ने यह वीडियो नहीं सुने या नही देखे हैं ।जिससे वह अब लोगों से प्रमाण मांगते घूम रहे हैं। लेकिन अब 4 जनवरी यानी कल होने वाले प्रदर्शन की आम जनमानस को प्रतीक्षा है।की कल क्या होगा,
