हरिद्वार । उत्तराखंड बने हुए 25 वर्ष हो चुके हैं इससे पहले हरिद्वार की पूरी जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ही हुआ करती थी जो भी जमीन गंग नहर के किनारे या उसके आसपास थी वह संपूर्ण जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के स्वामित्व की ही रही है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता उत्तरी खण्ड गंग नहर विकास त्यागी की माने तो कुंभ मेला लैंड जो बैरागी कैंप में है यह कुंभ मेले के लिए आरक्षित की गई है।
115 हेक्टेयर बैरागी कैम्प की भूमि कुम्भ मेले के लिए आरक्षित है, जो उत्तराखंड बनने से पहले से चली आ रही है।
बैरागी कैम्प की यह भूमि 115 हेक्टेयर भूमि है, इस भूमि पर 6 वर्षों में और 12 वर्षों में कुंभ मेले लगने के लिए इस भूमि को उत्तर प्रदेश सरकार ने आरक्षित किया हुआ है। कुंभ के दौरान यह जमीन कुंभ मेला अधिष्ठान को दे दी जाती है। और वह इस भूमि को साधु संतों के टेंट लगाने के लिए या साधु संतों के उपयोग के लिए साधु संतों को देते हैं। और मेला समाप्त हो जाने के बाद स्वतः ही यह भूमि उत्तर प्रदेश सरकार के नियंत्रण में आ जाती है।

लेकिन अब कुम्भ मेला भूमि पर हो रहे है कब्जे,लोगों ने बना लिए है पक्के मकान।
लेकिन बैरागी कैंप में देखने को मिला है कि वहां अब बेश कीमती जमीन पर लोगों ने कब्जे किए हुए हैं। यह कब्जे उत्तराखंड सरकार के कर्मचारियों की मर्जी से हुए हैं या उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों की मर्जी से हुए हैं यह तो स्पष्ट नहीं हो रहा है। लेकिन इतना जरूर है कि यह बेस कीमती भूमि जो सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की बताई जाती है और उत्तर प्रदेश सिंचाई भाग का ही स्वामित्व इस जमीन पर विकास त्यागी बताते हैं उस जमीन पर साधु संतों ने और तमाम लोगों के साथ ही एक कंपनी ने तो करीब ढाई सौ बीघा से अधिक जमीन पर कब्जा कर लिया है।

हालांकि यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार ने कम्पनी को अलॉट नहीं की है ,यह जमीन उत्तराखंड सरकार ने कम्पनी को मात्र 4 लाख रु साल के मामूली से किराए पर देने की संस्तुति कर रखी है। लेकिन उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने एनजीटी तक पहुंच कर , जमीन को बचाने का कार्य किया है। उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों को एनजीटी की तरफ से निर्देश दे दिए गए हैं, कि इस जमीन पर कोई कार्य बिना उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की अनुमति के न होने दिया जाए।
उत्तर प्रदेश के कर्मचारी जो हरिद्वार में कार्यरत है, वे हरिद्वार को हरित हरिद्वार बनाएंगे
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी का कहना है की हमारी जमीन मात्र 115 हेक्टेयर ही नहीं है टोटल हमारी जो भूमि हरिद्वार जनपद में है वह 4205 हेक्टेयर जमीन है ।इस जमीन पर भी कुछ लोगों ने कब्जे कर रखे है । जमीन पर कब्जा कराने में हरिद्वार के कुछ नेताओं की भी सहमति है, लेकिन अब उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग अपनी सारी संपत्ति को अपने कब्जे में लेकर यहां हरे वृक्ष लगाएगी और यह वृक्ष भी ऐसी प्रजाति के होंगे जिनको काटने के लिए परमिशन लेना भी मुश्किल होगा।

क्योंकि हरिद्वार एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहां देश-विदेश से लोग आते हैं और यहां हरियाली लगभग समाप्त होती जा रही है यहां पर लोगों ने कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए हैं जो की हरिद्वार की सौंदर्यता व यहां के पर्यावरण के लिए एक बदनुमा दाग है ।अब अपनी जमीन को लेकर हम यहां पेड़ लगाएंगे।
हरे पेड़ लगाने के लिए हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी,उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री जी भी हमेशा प्रेरित करते रहते है।
विकास त्यागी के अनुसार वृक्ष लगाने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर धामी जी भी हमेशा तत्पर रहते हैं और हरे वृक्ष लगाने की प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री जी ने तो एक पेड़ मां के नाम की योजना भी चला रखी है। हरे वृक्ष अगर हरिद्वार में लगेंगे तो पर्यावरण को भी संतुलित होने का मौका मिलेगा और हरिद्वार की सुंदरता भी देखने को मिलेगी।

कुम्भ, अर्ध कुम्भ के कार्य बाकायदा ड्रॉइंग बनवा कर होने चाहिए।
विकास त्यागी बताते हैं की कुंभ अर्ध कुंभ पर जो कार्य हरिद्वार में होते हैं वह कार्य प्रसंसनीय है, लेकिन वह कार्य नियमों के अनुसार टेक्निकल लोगों से ड्राइंग बनवाकर यदि किए जाएं तो सरकार के पैसे का सदुपयोग भी होगा और यह कार्य लंबे समय तक टिकाऊ रहेंगे, वी आई पी घाट से पहले से डैम कोठी नम्बर एक व कनखल की तरफ जाने वाला जल गंगा जल है।डैम कोठी से आगे जा रहा जल गंग नहर है।
उत्तराखंड सरकार के कुछ कारिंदे हर की पैड़ी के जल को गंगा जल ही नही मानते है, लेकिन विकास त्यागी के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है उनका कहना है कि जब इस गंग नहर का निर्माण हुआ था उस समय हरकी पौड़ी पर गंगाजल लाने के लिए हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों ने काफी आंदोलन किया था। और ब्रिटिश सरकार को उस समय मजबूरन गंगा की एक अविरल धारा को हर की पैड़ी पर लाना पड़ा था ।जो आज तक जारी है और यह गंगा की अविरल धारा हर की पौड़ी तक ही नहीं आती है यह डैम कोठी नंबर 1 से फिर कनखल की तरफ जो जल प्रवाहित हो रहा है यह गंगा जी हैं। और डैम कोठी नंबर एक के बाद गंग नहर शुरू होती है , इसलिए लोग इस भ्रम में ना रहे के हर की पैड़ी से लेकर डैम कोठी तक गंगा नहीं है।

उत्तराखंड सिचाई विभाग कुम्भ मेला भूमि को अपना बताता है। साधू सन्त कुंभ स्नान को लेकर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार पर बनाते है दबाव ।
उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता महोदय का कहना है की कुंभ मेला लैंड हमारी है ,और यहां पर उन्होंने बाकायदा पार्किंग के लिए एक नेता जी को ठेका भी दे रखा है, जबकि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अभियंता इस ठेके को गलत बताते हैं ,और इस ठेके के स्थान को भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की भूमि ही बताते हैं। दबी जुबान में कुछ और अधिकारियों से जब हमारी इस विषय पर बात हुई तो उनका यह कहना था की कुछ साधु संत उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तराखंड सरकार को कुंभ और अर्ध कुंभ में स्नान करने के नाम पर ब्लैकमेल करते हैं ।और इस ब्लैकमेल की आड़ में कुंभ मेले की जमीन पर कब्जा कर लेते हैं और कब्जा करने के बाद इन भूमियों को बेच देते हैं ।ऐसा ही मामला बैरागी कैंप में देखने को मिलता है ।यहां भी कुछ साधु संतों ने जमीनों पर कब्जे किए हुए हैं।

और इन जमीनों की खरीद फरोक भी शुरू हो चुकी है साधु संतो के अलावा , अन्य सैकड़ो लोगों ने बाकायदा कब्जे कर लिए हैं , व पक्के मकान बना लिए हैं । उत्तराखंड निर्माण से पूर्व 25 साल पहले उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की भूमि रही हो या अब जैसा कि उत्तराखंड सिंचाई विभाग इस भूमि पर अपना दावा करती है उनकी हो लेकिन किसी ने भी इस भूमि को बचाने का प्रयास नही किया केवल इतना किया है की भूमि पर कब्जा करने वालों को नोटिस दे दिया जाए या। उनके ऊपर कोई मुकदमा कर दिया जाए जिसमें आज तक कोई भी निर्णय सामने नहीं आया है। लोगों ने बाकायदा जमीनों पर कब्जे कर लिए हैं पक्के मकान बना लिए हैं दुकान बना लिए हैं और आराम से रह रहे हैं,
आदरणीय विधायक मदन कौशिक जी के चहेते भी काबिज है ,बैरागी कैम्प की भूमि पर।
बैरागी कैंप की कुछ जमीन पर हमारे आदरणीय विधायक मदन कौशिक जी के चहेते लोग भी बसे हुए हैं ,और मदन कौशिक जी गाहे बगाहे। यहां विधायक निधि से कुछ ना कुछ कार्य भी कराते रहते हैं ।विधायक जी बहुत ही सरल हृदय के व्यक्ति हैं उनसे किसी गरीब का दुख देखा नहीं जाता इसलिए गरीबों को जहां जगह मिलती है वह बसाने में सहायता करते हैं।

उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में सम्पत्तियों के बंटवारे को लेकर हो चुकी है कई बैठक।
उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में संपत्तियों के बंटवारे को लेकर कई बार बैठकें भी हो चुकी है। लेकिन आज तक इन संपत्तियों का सही से बटवारा नहीं हो सका है। जिसकी वजह से दोनों विभाग उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग व उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारियों के बीच पत्राचार व तनातनी चलती रहती है ।अब देखना यह है की विकास त्यागी जी की हरित हरिद्वार की कल्पना कब तक सिरे चढ़ती है। क्योंकि हरिद्वार एक ऐसा स्थान है जहां अपने हिसाब से नियम कायदे बना लिए जाते हैं हरिद्वार के श्रवण नाथ नगर में गंगा किनारे एक पांच सितारा सितारा होटल के निर्माण के लिए गंगा जी को गंग नहर घोषित करवा दिया गया था ।और उत्तराखंड सिंचाई विभाग कुछ नहीं कर पाया था जिन दिनों में गंग नहर बंद होती है उन दिनों में भी जमकर गंगा किनारे निर्माण शुरू कर दिए जाते हैं और गंगा किनारे आराम से निर्माण हो जाते हैं, कोई इन निर्माणों को रोकने वाला नहीं है।

अगर आप किसी से शिकायत करें भी तो किससे करें उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से करेंगे तो वह कह देंगे कि यह उत्तराखंड वालों ने कर दिया, और उत्तराखंड वालों से करेंगे तो वह कह देंगे कि उत्तर प्रदेश वालों ने कर दिया है। लेकिन निर्माण तो हो ही गया ना अब यह निर्माण टूटने से तो रहा, कुंभ मेला लैंड के या अन्य कई हरिद्वार की लैंड के , एनजीटी में भी केस चल रहे है और केश लंबे चलते हैं इतने में अधिकारियों का तबादला हो जाता है दूसरे अधिकारी आते हैं वह इन सब चीजों में बहुत ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं ।और जिन लोगों ने जमीनों पर कब्जे किए होते हैं या सरकार के कर्मचारियों से मिली भगत कर खरबों की जमीन को ओने पौने दामों में ले ली जाती है वह जमीन उनकी और उनके बाप दादा की हो जाती है। इस पूरे खेल में मौज हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण की रहती है।जो खुद उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग की जमीन पर बैठा बताया जाता है।
