हरिद्वार । सीबीआई जांच हुई तो बीजेपी के पूर्व विधायक व रविदासाचार्य सुरेश राठोड़ की मुश्किलें ही बढ़ेंगी।
हरिद्वार से बीजेपी के विधायक रह चुके सुरेश राठौड़ ने पता नहीं क्यों अपनी प्रेमिका या पत्नी से अंकिता भंडारी हत्याकांड के बारे में फोन पर जो बातें की हैं, और उन बातों को उर्मिला ने रिकॉर्ड कर उत्तराखंड राज्य के साथ-साथ लगभग पूरे देश को यह बातें वायरल कर सुनवा दी है।
इन बातों को ऑडियो और वीडियो के माध्यम से सुनने के बाद आपको सीधे-सीधे पता चल गया होगा ,की सुरेश राठौड़ ने ही इस ऑडियो वीडियो में उर्मिला से अंकित भंडारी हत्याकांड में शामिल बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के नाम तो लिए हैं ।साथ ही इन लोगों को बचाने का आरोप भी राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर लगाया है।
उर्मिला ने चतुराई से की रिकॉर्डिंग, सुरेश राठौड़ अपने को ही तीरंदाज समझ रहे थे लेकिन उर्मिला ने उनसे भी आगे निकल कर नेता जी को उनकी असलियत बता दी।

इस ऑडियो वीडियो में बहुत ही चतुराई के साथ उर्मिला ने सारी बातें रिकॉर्ड कर ली और एक नहीं दो-दो बार यह बातें उनसे रिपीट करवा कर यह सारी बातें वायरल कर दी इन बातों को वायरल करने के पीछे क्या राज है यह तो उर्मिला और सुरेश राठौड़ जानते होंगे लेकिन शुरुआत तो इन बातों को बोलने की सुरेश राठौड़ ने ही की है सुरेश राठौड़ ने ही अपने ऑडियो वीडियो में कहा है।
कि वह जो गट्टू है ना गट्टू उसके साथ अंकित भंडारी ने हम बिस्तर होने से मना कर दिया था। इसीलिए उसकी हत्या की गई ।साथ अजय कुमार का नाम भी सुरेश राठौड़ ने अपने ऑडियो वीडियो में लिया है। और यहां तक कहां है की सीबीआई जांच से इन लोगों के राज्य के मुख्यमंत्री धामी जी बचा रहे हैं।
फजीहत होने पर आरोप उस कॉंग्रेस पर जो खुद कई धड़ों में इस छोटे से राज्य में बंटी हुई है।

अब आप खुद सोच ले इस प्रकरण में कांग्रेस कहां से आ गई। कांग्रेस तो खुद ही राज्य में चार-चार हिस्सों में बची बची हुई है ,कांग्रेस के अगर सारे लोग एक संग मिलकर एकजुट होकर काम कर लें तो शायद कांग्रेस को भी अब दोबारा सत्ता में आने का मौका मिल जाए ।लेकिन कांग्रेस के तो सभी नेता अपनी डफली अपना राग करते हैं । वह विपक्ष की या आम जनता की किसी महिला को क्या बर्गलायेंगे, और ऐसी महिला जिसका कांग्रेस से कभी कोई लेना-देना रहा है या नहीं रहा है ।इसकी तो कोई पुष्टि हो नहीं रही है।
निष्कासित पूर्व विधायक पर कार्यवाही करने की बजाए ठीकरा कॉंग्रेस के सर।
लेकिन सबसे बढ़िया काम है भाजपा अपने आप को बचाने के लिए और अपने पूर्व विधायक और निष्कासित सुरेश राठौड़ को बचाने के लिए कांग्रेस के सिर पर इस प्रकरण का घड़ा फोड़ रही है। जबकि यह सारी बातें तो स्वयं बीजेपी के विधायक रहे। आदरणीय सुरेश राठौड़ जी ने ही ऑडियो वीडियो में कहीं है, और इस ऑडियो वीडियो को हम सुना भी सकते थे लेकिन इतनी गंदी भाषा का प्रयोग सुरेश राठौड़ ने इस ऑडियो वीडियो में इन नेताओं के बारे में किया है।

की वह सुनाई नहीं जा सकती है। क्योंकि सारे समाचार और सारी चीज हमारे राज्य के और देश के बहुत सारे लोग देखते और पढ़ते हैं ।तो इन बातों को भी देखते हुए गरिमा बनाए रखना हमारा फर्ज है। अन्यथा हम वह सारी बातों का वीडियो आपके सामने पेश कर सकते थे ।और हमने नहीं किया हो तो कोई बात नहीं वीडियो तो वायरल हो ही गया है। सब लोगों ने देख लिया है वायरल तो हो चुका है वह वीडियो और 4 दिन तक खूब चलता रहा अब भी चल रहा है ।उसमें आप खुद देख लीजिए।
कौन क्या कह रहा है, उर्मिला की बात माने तो उसमें सच्चाई है की उसने कभी भी पुष्कर सिंह धामी का या अजय कुमार का नाम इस वीडियो ऑडियो में तो लिया ही नहीं उसने तो दुष्यंत गौतम का नाम और महेंद्र भट्ट का नाम भी नहीं लिया था यह सारे काम तो आदरणीय पूर्व विधायक जिन्हें पार्टी ने भी निष्कासित कर दिया है ।उनके मुखारविंद से निकले है।उनके भाषण के बाद ही चर्चा का विषय बने और उन्हीं को दोहराकर उर्मिला ने वायरल कर दिया।
अब तो सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
लेकिन अब बात तो केवल मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच कराने की हो रही है ।मुख्यमंत्री के ऊपर कोई किसी तरीके का आरोप नहीं लग रहा है ।मुख्यमंत्री से तो केवल इतनी मांग की जा रही है कि वह सीबीआई जांच की सिफारिश करें और यह मामला यह प्रकरण जो है इसकी जांच निष्पक्ष हो और पहाड़ की इस बेटी अंकित भंडारी को न्याय मिल सके, जिससे उत्तराखंड सरकार के मुखिया धामी जी जो कहते हैं कि हम उत्तराखंड राज्य को उत्तम राज्य व सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाएंगे यह बात उनकी पूरी हो सके ।

इस प्रकरण को लेकर राज्य की महिलाओं में है आक्रोश, ये पहाड़ की महिलाएं है, जिनके बूते ही उत्तराखंड राज्य बना है।
इस समय राज्य में जो उबाल देखने को मिल रहा है खासकर महिलाओं में क्योंकि यह राज्य भी महिलाओं के ही बल पर बन पाया है। महिलाओं ने ही इस राज्य के निर्माण में बलिदान दिया है अपनी अस्मत लुटवाई है आंदोलन किए हैं ।तो महिलाएं अगर जाग गई जिस तरह की बातें सामने निकलकर आ रही हैं कि अंकित भंडारी को न्याय मिलना चाहिए ।और उसके प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए तभी यह प्रकरण शांत होगा अन्यथा महिलाएं अब देहरादून की ओर कूच करेंगी और शांति से बैठने नहीं दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी की तरफ सबकी निगाह।मुख्यमंत्री ने अब तक जो मेहनत राज्य के विकास के लिए की थी,उस पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
अब देखना है कि मुख्यमंत्री क्या कदम उठाते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ने जितनी मेहनत और लगन से इस राज्य को धीरे-धीरे विकास की ओर ले जाने में कार्य किया था, और आम जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई थी ,उस सब को इस अंकित भंडारी मर्डर प्रकरण ने एक तरीके से मिट्टी में मिलाने का काम कर दिया है। जिसकी भरपाई करना फिलहाल तो काफी मुश्किल दिखाई दे रहा है ।
कही यह लड़ाई रविदासाचार्य की गद्दी को लेकर तो नही।
हमें जो लगता है यह लड़ाई सुरेश राठौड़ व दुष्यंत गौतम के बीच कोई राजनीतिक लडाई या अंकित भंडारी को लेकर लड़ाई नहीं है ।यह रविदास आचार्य की गद्दी को लेकर लड़ाई चल रही है। क्योंकि सुरेश राठौड़ जी को जब बीजेपी ने पार्टी से 6 वर्ष के लिए निकाल दिया था। उसके बाद सुरेश राठौड़ जी पैदल हो गए थे और उन्होंने अपने आप को रविदासाचार्य घोषित कर दिया था।
कथाएं वाचने लगे थे, तमाम तरीके के जो लोग हरिद्वार में गेरूआ वस्त्र धारण कर कोई भी आदमी आराम से साधू बन जाता है। दुष्यंत गौतम ने अपने समाज को सुरेश राठौड़ जैसे व्यक्ति से किनारा करने की सलाह दी होगी ।उसके बाद से ही यह मामला उठ रहा है। बाकी तो जांच होगी अगर सीबीआई जांच होती है तो सारा मामला दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
