देहरादून । कांग्रेस के शीर्ष नेता टक्कर कैसे ले सभी के भाजपा शासन में हो रहे हैं धड़ल्ले से काम,
2027 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में फिलहाल तो बीजेपी का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, भले ही विगत 3 महीनो में बीजेपी सरकार की कुछ नौकरशाहों की वजह से काफी फजीहत हो चुकी हो, और संघ के आला पदाधिकारी व बीजेपी के बड़े नेता के कारण भी बीजेपी सरकार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा हो ,उसके बावजूद भी पुष्कर सिंह धामी इन सभी मुश्किलात से बाहर निकल आए हैं ,कुछ लोगों का मानना है की धामी जी पूजा पाठ में और तंत्र-मंत्र में काफी विश्वास रखते हैं इसीलिए उनको अभयदान मिल गया है, लेकिन भले ही अभयदान मिला हो फिलहाल तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ उनकी पीठ पर बना हुआ है, और वह अब धड़ले से बेफिक्र हो कर काम कर रहे हैं ,

धामी के चेहरे पर कई माह बाद दिखाई दी है मुस्कान।
धामी जी के चेहरे पर अब मुस्कान भी दिखाई देने लगी है ,पुष्कर सिंह धामी ही नहीं बल्कि उनकी धर्मपत्नी गीता धामी भी उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर जनता के बीच जा रही है ,और जनता भी उनको काफी तवज्जो दे रही है।

जबकि कांग्रेस के हालात यह हैं कि कांग्रेस की प्रवक्ता सुजाता पाल को छोड़ दिया जाए, तो बाकी जो नेता है उनका तो यही नहीं पता की भीतर खाने चल क्या रहा है, कौन किस तरफ है कैसे चुनाव लड़ेंगे कैसे टिकट बाटेंगे किन को टिकट दिए जाएंगे किन को नहीं दिए जाएंगे, केवल सुजाता पाल बीजेपी सरकार से खुलकर टक्कर लेती रहती हैं ,बाकी चाहे माननीय प्रीतम सिंह जी हो या हरक सिंह रावत हो या नए-नए अध्यक्ष बने गोदियाल जी हो ,सब केवल यदा कदा एक ब्यान देकर विपक्षी होने की भूमिका निभा देते है, करण माहर तो शांत बैठ गए हैं। ऐसी स्थिति में 2027 के चुनाव कांग्रेस कैसे लड़ेगी,

कॉंग्रेस कैसे लड़ेगी चुनाव, कैसे देगी बीजेपी को टक्कर।
कांग्रेस शायद यह सोचे बैठी है कि इस बार उनको ही राज्य की जनता मौका देगी ,लेकिन मौका तो जब देगी जब कांग्रेसी कुछ करेंगे कुछ हाथ पैर मारेंगे, जबकि ऐसा तो अभी तक कांग्रेसियों की तरफ से कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा है । हरीश रावत को ये कांग्रेसी कुछ करने नही देते है,जबकी उत्तराखंड में इस समय हरीश रावत से सीनियर कोई नेता नही है, चाहे वो कॉंग्रेस हो या बीजेपी हो, भाजपा सरकार में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के धड़ल्ले से खुलेआम काम हो रहे हैं, ऐसी स्थिति में यह नेता धामी सरकार के खिलाफ कैसे खुलकर सामने आयेंगे, बड़े बुजुर्गों की कहावत है।

खाएगा तो आंख तो लजायेगा ही, वही स्थिति कांग्रेस के नेताओं की होती दिखाई पड़ रही है , यही हाल रहा तो केवल जनता के भरोसे कांग्रेस चुनाव नहीं जीत पाएगी, चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को लोहे के चने चबाने होंगे, और केवल देहरादून में बैठकर चुनाव नहीं जीता जा सकता ,इसके लिए राज्य के 13 के 13 जिलों में कॉंग्रेस नेताओं को भ्रमण करने होंगे व अपनी बात जनता को बतानी होगी तभी जाकर कुछ परिणाम सामने आ सकेंगे, अन्यथा फिलहाल तो धामी जी की बल्ले बल्ले दिखाई दे रही है, और धामी जी का ही सिक्का बुलंद है ।अंकिता भंडारी कांड जरूर धामी जी को परेशानी में डाल सकता है, अब इसको कितना मैनेज कर पाते हैं यह तो धामी जी जानते होंगे, लेकिन कांग्रेस फिलहाल इस अंकिता भंडारी मैटर को भी कायदे से नहीं भुना पा रही है।

