हरिद्वार ।
तीर्थ नगरी हरिद्वार में एक छोटी सी झोपड़ी नुमा मकान में रहते हुए योग सिखाने वाले योग गुरु बाबा रामदेव व उनके शखा आचार्य बालकृष्ण ने इतनी तरक्की की है की इसको देखकर केवल इतना ही कहा जा सकता है कि जब ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ के नहीं आसमान फाड़ कर ही दे देता है।
योग गुरु बाबा रामदेव अब जिस तरह से पहले योग शिविर लगाया करते थे अब उन योग शिविरों को तो भूल चुके हैं, अब उनका सारा ध्यान माता लक्ष्मी की आराधना में लगा हुआ है, हालांकि दौलत ने उनको इस कदर नवाज है, की उनके सात नहीं 14 पुस्ते भी बैठकर खाएंगे तो दौलत खत्म नहीं होगी ।

बाबा की दुकान के प्रोडक्ट् क्यों हो रहे है फेल,इस ओर देना होगा बाबा को ध्यान।
सबसे बड़ी दिक्कत इस समय बाबा रामदेव के सामने यह आ रही है कि उनके काफी प्रोडक्ट जांच में फेल होते जा रहे हैं इसके बारे में बाबा रामदेव को शायद ज्ञान हो या ना हो हम उनको बता देते हैं की बाबा रामदेव जी आपके यहां जो प्रोडक्ट तैयार होते हैं वहाँ बिल्कुल सरकारी सिस्टम के हिसाब से ही कार्य चलता है।
बिना लिए दिए आपके यहां भी जड़ी बूटियों से तैयार होने वाले प्रोडक्ट का निर्माण नहीं होता हैं ,जहां से आपके यहां यह जड़ी बूटियां और अन्य तमाम तरह की चीज आती हैं जिनसे आपकी दवाइयां या अन्य खाद्य पदार्थ तैयार होते हैं उन सभी में इन जड़ी बूटियां और खाद्य पदार्थों को सप्लाई करने वालों को आपके यहां बैठे कारिंदों को बाकायदा कमीशन देना पड़ता है तभी जाकर यह सामान वह लोग आपके यहां सप्लाई कर पाते हैं, और इसी कमीशन बाजी के व चोर बाजारी के चक्कर में आपके यहां काफी प्रोडक्ट फेल होते जा रहे हैं, व उनकी गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लगते जा रहे हैं,बाबा के यहाँ कार्य करने वाले सभी कर्मचारी कमीशन खोर नही है, कुछ चंद कर्मचारियों के लालची होने के कारण नाम स्वामी रामदेव का बदनाम होता है।

बाबा रामदेव देश का सबसे बड़ा उद्योगपति बनने के चक्कर मे अपने यहाँ काम करने वाले कारिंदे की करतूतों पर ध्यान नही दे पा रहे है।
बाबा रामदेव या बालकिशन या बाबा रामदेव के भाई राम भारत को शायद इन चीजों की भनक तो होगी लेकिन इन पर यह लोग लगाम लगा पाने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं ,जिसकी वजह से बाबा रामदेव जी के प्रोडक्टों की गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं, बाबा रामदेव जी आचार्य बालकृष्ण जी व राम भरत जी आप तीनों को अपने यहां आने वाली जड़ी बूटियां व तमाम अन्य खाद्य पदार्थों के ऊपर निगाह रखनी होगी, तभी जाकर आप के यहां का प्रोडक्ट उत्तम क्वालिटी का प्रोडक्ट कहलायेगा अन्यथा यह प्रोडक्ट इसी तरीके से फेल होते जाएंगे।
स्वामी जी आपके यहां जो ऊंचे पदों पर बैठे कारिंदे है, जिनके हाथों में पतंजलि का पूरा दारो मदार है उनकी माली हालत आप पहले के मुकाबले में अब देख सकते हैं, की उनकी माली हालत में किस कदर इजाफा हुआ है। और इसके पीछे कारण आपके यहाँ के प्रोडक्ट के कच्चे माल पर खाई जाने वाली कमीशन ही प्रमुख है।जबकी आप उत्तम क्वालिटी की जडी बूंटी व अन्य सामान खरीदने का पेमेंट करते है

लेकिन खरीदारी निम्नन स्तर के माल की होती है।जिसको आप कभी भी आपके यहाँ सप्लाई होने वाले माल की अचानक चैकिंग कर देख भी सकते है, की आपके यहाँ हो क्या रहा है।आप सरकारों से फ़ायदे उठाने के अलावा अपने प्रोडक्ट की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिजीये।आप दोनों ही दोस्तों के बीबी बच्चे नही है, जिनके लिए आप इतनी दौलत जमा करने में जुटे है।
कोई घमंड या अवगुण नही है स्वामी रामदेव, अचार्य बाल कृष्ण व रामभरत में जो ज्यादा धन आने के बाद मानव में आ ही जाते है।लेकिन अपने साम्राज्य को और शिखर पर देखना चाहते है स्वामी जी।

कहा जाता है कि जब लक्ष्मी आती है तो मानव के अंदर कई तरह के अवगुण भी साथ लेकर आती है, लेकिन यह बहुत ही अच्छी बात है, की चाहे योग गुरु बाबा रामदेव हो चाहे उनके भाई राम भरत हो चाहे उनके शखा आचार्य बालकृष्ण किसी पर भी आज तक कोई ऐसा आरोप नहीं है, जो आजकल के गेरुआ वस्त्र धारी संतो के ऊपर आए दिन लगते रहते हैं, चरित्र के मामले में इन तीनों पर आज तक कोई उंगली नही उठा पाया है।ये तीनों ही आम जनमानस व गरीबों की भी काफी मदद करते हैं।
और अपने पुराने दिनों को बाबा रामदेव और आचार्य बालकिशन कभी नहीं भूलते , समय-समय पर कभी ना कभी यह इस बात को स्पष्ट कर देते हैं, की हमने वह दिन भी देखे हैं, जब हम दो समय का भोजन भी नहीं कर पाते थे, केवल दिन में एक बार ही भोजन करके अपना गुजारा कर लेते थे ,और टूटी हुई साइकिल पर चला करते थे, लेकिन आज प्रभु की असीम कृपा है इसके लिए हम प्रभु का आभार व्यक्त करते हैं।

स्वामी रामदेव जी के अनुज राम भरत
स्वामी जी उनके भाई व शखा में किसी तरीके का कोई घमंड भी देखने को नहीं मिलता है ।लेकिन अपने साम्राज्य को स्वामी जी पता नही कौन से शिखर पर ले जाना चाहते है।जिसके लिए नये नये तरह के प्रोडक्ट्स बेचना शुरू कर देते है।योग में कम और दुकानदारी में स्वामी जी अब ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे है।
