हरिद्वार में प्रशासन ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। तीर्थनगरी के गरहमीरपुर तहसील क्षेत्र में सिंचाई विभाग की जमीन पर बनाई गई एक अवैध मजार को जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं।
नोटिस के बाद भी नहीं दिखाए गए दस्तावेज
जानकारी के अनुसार, सुमन नगर क्षेत्र में स्थित इस अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने लगभग एक माह पूर्व नोटिस जारी किया था। नोटिस में संबंधित खादिमों से भूमि और निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। तय समयसीमा के भीतर कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर बुधवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई से पहले खाली कराया गया स्थल
मौके पर मौजूद एसडीएम जितेंद्र सिंह ने बताया कि कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय दिया गया था। उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण से पूर्व खादिमों ने स्वयं ही अपने आवश्यक सामान को वहां से हटा लिया था, जिससे किसी प्रकार का विवाद या तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में पूरे क्षेत्र को खाली कराकर बुलडोजर चलाया गया।
संरचना के नीचे नहीं मिले कोई अवशेष
अधिकारियों के मुताबिक, जब अवैध संरचना को हटाया गया तो उसके नीचे किसी प्रकार के धार्मिक अवशेष या संरचनात्मक साक्ष्य नहीं मिले। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निर्माण पूरी तरह से हाल ही में किया गया था और इसका कोई ऐतिहासिक या पारंपरिक आधार नहीं था।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कार्रवाई
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि यह कार्रवाई राज्य सरकार के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
सीएम का बयान: सांस्कृतिक स्वरूप बनाए रखना प्राथमिकता
वहीं, मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि देवभूमि उत्तराखंड, विशेषकर हरिद्वार के सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उनके अनुसार, राज्यभर में अब तक करीब 600 से अधिक अवैध धार्मिक संरचनाओं को हटाया जा चुका है,
