हरिद्वार । भाजपा मंडल अध्यक्ष की हरिद्वार के विधायक व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक से गुहार ,की मैं आपका सच्चा सिपाही हूं। मेरा नक्शा पास कराओ और मेरे ऊपर मुकदमा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच बैठाओ ।
हरिद्वार में बीजेपी के मंडल अध्यक्ष किशन बजाज का कहना है की वह बीजेपी के एक निष्ठावान और ईमानदार पदाधिकारी हैं। उनकी एक बिल्डिंग बन रही है जिसके लिए हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के कर्मचारी उनकी बिल्डिंग का नक्शा पास नहीं करने दे रहे हैं ।
किशन बजाज का कहना है कि हरिद्वार विकास प्राधिकरण में आते-आते उनकी चप्पल घिस गई हैं ।लेकिन अधिकारियों के कानों पर जून नहीं रेंग रही है। इसलिए वह मदन कौशिक से गुहार लगा रहे हैं।
कि वह मदन कौशिक जी के सच्चे सिपाही हैं ,और मदन कौशिक जी के लिए वे अपनी जान भी दे देंगे और पहले भी उन्होंने उनके लिए काफी काम किया है और काफी लड़ाइयां लड़ी है ।और वह पार्टी के निष्ठावान कार्य करता है ।इसलिए उनका काम मदन कौशिक जी को करना चाहिए।
हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण के कथनानुसार ,नक्शा नियमानुसार ही पास किया जा सकता है, गंगा से 200 मीटर पहले नक्शा पास नही हो सकता।

हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार यह नक्शा बिल्कुल अवैध है। गंगा से 200 मीटर के बीच में है जिस धर्मशाला पर यह होटल बनाने के लिए जद्दोजहद चल रही है वह जगह भी एक अखाडे की है जिस जमीन पर नक्शा पास कराने की कोशिश की जा रही है। वह नक्शा पास किसी कीमत पर वहां पास नही हो सकता है।
क्योंकि गंगा के 200 मीटर की अवधि में वह जगह आती है। और जो साहब यह नक्शा पास कराना चाहते हैं। उनकी यह खुद की जमीन भी नहीं है । इस स्थान को दो बार नोटिस दिया जा चुका है ।ना मानने पर उनके खिलाफ मुकदमा भी कायम किया जा चुका है ।
उसके बावजूद भी इन्होंने काम नहीं रोका है। तब जाकर प्राधिकरण को कार्रवाई करनी पड़ी है। अब किशन बजाज जी के पास कोई रास्ता नहीं बचा है तो वह अपने साथ 5-10 लोगों को लेकर हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के कार्यालय के बाहर बैठ गए है और धरना वहां पर दे रहे हैं। की मेरा नक्शा पास करो और नहीं तो हर की पैड़ी गंगा घाट पर चलकर कसम खाओ के यहां पर सारे काम सही हो रहे हैं ।
बजाज साहब नक्शा तो नियमानुसार ही पास होगा।
भाई सारे काम सही हो रहे हो ना हो रहे हो किशन बजाज जी लेकिन मदन कौशिक जी ने तो आपसे कहा नहीं होगा कि आप उस धर्मशाला पर जाकर अपने नाम से नक्शा पास करने के लिए हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण में पेश कर दें । जो जगह गंगा से 200 मीटर की दूरी के बीच में ही आ रही है।
उसका नक्शा वह पास करा देंगे। मदन कौशिक जी अपने कार्यकर्ताओं का काफी ख्याल रखते हैं। लेकिन इतना जबरदस्त ख्याल तो शायद मदन कौशिक जी ने भी नही रखा होगा कि वह एच आर डी ए को यह आदेश दे दें कि आप इन महोदय का यह नक्शा पास कर दो जिसके लिए उनके ऊपर मुकदमा भी कायम हो चुका हो। तो मदन कौशिक जी के लिए किशन बजाज जी आपने काम किया होगा ।
एक अकेले आप ही मदन कौशिक जी के लिए काम नहीं करते हैं। और भी बहुत सारे कार्यकर्ता मदन कौशिक जी के लिए कार्य करते है। लेकिन इस तरीके से नहीं करते हैं। जिस तरीके से आप कर रहे हैं । यह वही बात हुईं की चोरी और सीना जोरी ,आप एक तरीके से तो अन ऑथराइज्ड नक्शा पास करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। और अगर यह नक्शा पास करने में हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण मजबूर है।
तो फिर आप धरना प्रदर्शन पर उतारू हो गए हैं। तो इस तरह की तो आप यह नई नीव डाल रहे हैं ।यह तो शहर के और भी बहुत सारे लोग, वे भी यहीं रास्ता अपना सकते है। इस काम को कर सकते हैं उनके भी नक्शे पास नहीं हो रहे हैं। ठीक है विभाग के कुछ कर्मचारियों में कुछ खामियां भी हो सकती है।

लेकिन नियम तो नियम है ,आप नियमानुसार चलें और नियमानुसार अपना नक्शा पास कराये थोडी बहुत कमियाँ तो नजरअंदाज भी की जा सकती है। अगर आपका नियम अनुसार नक्शा पास नहीं होता है ।
नियमानुसार नक्शा पास न होने पर न्यायालय भी जा सकते है।
आप धरने प्रदर्शन की बजाय न्यायालय की शरण में जाएं ,और न्यायालय को बताएं कि सर मै नियम अनुसार अपना नक्शा पास कराना चाहता हूं और यह हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के अधिकारी या कर्मचारी मेरा नक्शा पास नहीं कर रहे हैं। या और भी बहुत सारे तरीके हैं ।आप मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेज सकते हैं।
कि मेरा नक्शा वाजिब है लेकिन हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी नक्शा पास नहीं कर रहे हैं । लेकिन जो तरीके आप अपनाये हुए हैं, जिसको लोग ड्रामा ही कह रहे हैं ।तो यह तो उचित नहीं लग रहा है। और रही बात मंत्री मदन कौशिक जी की तो मंत्री जी भी इस चीज को बहुत अच्छी तरीके से समझ रहे होंगे कि मामला क्या है।
अन्यथा अगर यह मामला ठीक होता तो अब तक मदन कौशिक भी उच्च अधिकारियों से बात कर चुके होते ।समझे किशन बजाज जी तो इस तरीके से भीड़ इकट्ठी करने से या गंगा जी में कसम खाने से तो बहुत सारी चीजों का समाधान नहीं निकलता है।
