हरिद्वार ।यादव परिवार के इस शोक की घड़ी में योग गुरु बाबा रामदेव भी वी आई पी घाट पर मौजूद थे।
लेकिन अपने आप को मुलायम सिंह यादव और रामगोपाल यादव के साथ ही पूरे मुलायम सिंह यादव परिवार का खास गुरु प्रचारित करने वाले काली पीठाधीश्वर स्वामी जी महाराज जो अब निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर हैं, वे दिखाई नहीं दिए ,उनकी अनुपस्थिति को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं होती रही।
हालांकि संभवत आचार्य महामंडलेश्वर जी हरिद्वार के आसपास ही मौजूद थे, जो की एक कार्यक्रम में देहरादून जनपद में शायद शिरकत करने पहुंचे हुए थे। ऐसा तो नहीं होगा कि प्रतीक यादव के अस्थि कलश के हरिद्वार पहुंचने की सूचना आचार्य महामंडलेश्वर जी को न हो । शायद अब यादव परिवार से उनका कोई विशेष लगाव न रह गया हो। इसलिए उन्होंने यादव परिवार से इसलिए ही दूरी बना ली हो,
यह तो कलयुग है ,यहां तो समय की नजाकत को देखकर ही लोग रिश्ते बनाते हैं, और रिश्ते तोड़ देते हैं ।लेकिन जिस परिवार के नाम पर महाराज जी की दुकान धडल्ले से चली हो ,उस परिवार से भले ही उनके अब सम्बंध न हो ,लेकिन दुःख की घड़ी में तो लोग दुश्मन के यहाँ भी चले जाते हैं।

इस समय भाजपा का जमाना है, शायद आचार्य महामंडलेश्वर महोदय ने यह ना सोच लिया हो की कहीं भाजपा के लोग बुरा ना मान जाए ,इसलिए हो सकता है उन्होंने दूरी बना ली हो लेकिन बीजेपी के तो खासम खास योग गुरु बाबा रामदेव भी हैं।
उन्होंने तो दूरी नहीं बनाई वे तो यादव परिवार के इस शोक की घड़ी में वीआईपी घाट पर पहुंचे और बाकायदा प्रतीक यादव के अस्थि कलश को विसर्जित करवाया । इसको कहते हैं आत्मीयता, योग गुरु बाबा रामदेव के अंदर आत्मीयता है, वह संबंधों को पहले महत्व देते हैं।

कुछ लोग समय की नजाकत को देख कर सम्बंध बनाते है, जहाँ लाभ दिखाई देता है ,अब सम्बंध वहीं आगे बढ़ाएं जाते हैं।
कुछ लोग ऐसे हैं ,जो समय की नजाकत को देखते हुए कब कहां संबंध स्थापित करने हैं वह लोग वही संबंध स्थापित करते हैं ,क्योंकि जहां से लाभ होगा संबंध तो वही बनाए जाएंगे ,जहां से लाभ नहीं होगा वहां संबंधों का क्या फायदा।
