उधर संस्कृत महाविद्यालय के सभी कर्मचारी और अध्यापक हड़ताल पर चले गए हैं। प्राचार्य महोदय अस्वस्थ होने के कारण संस्कृत विश्वविद्यालय नहीं आ रहे हैं संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के एक कर्मचारी धीरज यादव की पिछले महीने 9 अगस्त को उस समय मौत हो गई थी जब जिला अधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित द्वारा कांवर मेले के दौरान सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने के आदेश जारी किए थे

उसके बावजूद संस्कृत महाविद्यालय के कर्मचारियों से प्राचार्य महोदय द्वारा कार्य कराया जा रहा था, धीरज यादव नाम के जिस कर्मचारी की मौत विद्यालय में ही हुई है उस धीरज यादव नामक कर्मचारी को कॉलेज के प्राचार्य कृष्ण कुमार पांडे के आदेश पर ही ऊपर छत पर टंकी साफ करने के लिए भेजा गया था।
हालांकि कई अध्यापकों ने व धीरज यादव ने मना भी किया था कि साहब मैं ऊपर टंकी साफ करने नहीं जा सकता हूं मैं आज तक कभी टंकी साफ करने गया भी नहीं हूं मुझे इसका कोई तजुर्बा भी नहीं है ,तब भी कृष्ण कुमार पांडे ने जबरन धीरज यादव को ऊपर भेजा और वहां उसका छत पर शव पड़ा हुआ मिला ,जबकि कुछ कर्मचारियों का कहना है की करंट लगने से उसकी मौत हुई है, कुछ कह रहे हैं कि वह टीन पर से भी फिसल कर गिर सकता है।

30 वर्षीय मृतक धीरज यादव अमेठी का रहने वाला था वह अपनी पत्नी भाई व परिवार के चार सदस्यों के साथ संस्कृत महाविद्यालय में कार्य करते थे उसकी मौत के बाद प्राचार्य ने थोड़ी सी भी नैतिकता व इंसानियत दिखाना उचित नही समझा, धीरज को अस्पताल ले जाते समय उसकी तरफ देखना तक प्राचार्य ने उचित नही समझा।
जब प्राचार्य कृष्ण कुमार पांडे से पूछा गया कि जब जिलाधिकारी ने उस समय छुट्टीयां घोषित कर रखी थी ,तो आपने उसको छत पर क्यों चढ़ाया तो इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया कि ना तो मुझे यह पता है कि कब वह छत पर गया ना मैंने भेजा था जबकि विद्यालय के ही तमाम शिक्षकों का और कर्मचारियों का यही कहना है कि प्राचार्य महोदय ने ही उसको छत पर चढ़ाया था।
प्राचार्य महोदय बनारस के रहने वाले हैं और नागपुर में सर्विस करते थे वहां से छुट्टी लेकर यहां प्राचार्य पद की कुर्सी संभाले हुए हैं 6 माह हो गए हैं अब तक इन्होंने ऐसा कोई कार्य नहीं किया है जिससे यह पता चले कि यह प्राचार्य पद को सही तरीके से संभाल रहे हैं ,

कृष्ण कुमार पांडे जी ने उसके परिवार के किसी भी व्यक्ति से बात करना तक मुनासिब नहीं समझा है, प्राचार्य के इस आचरण से विद्यालय के शिक्षक व कर्मचारी बेहद नाराज हैं और सभी लोग अनशन पर चले गए हैं। इन लोगों की मांग है कि धीरज यादव की पत्नी को नौकरी दी जाए व मृतक के परिवार को मुआवजा दिया जाए,
प्राचार्य महोदय से जब बात हुई तो उनका कहना था कि इसके लिए एक कमेटी बना दी गई है एक महीना हो गया है कमेटी बनाए हुई, उधर कमेटी की प्रमुख का कहना है की कमेटी तो अपनी रिपोर्ट तब देगी जब उसको रिपोर्ट दिए जाने को कहा जायेगा ,कमेटी भले ही 1 महीने पहले बना दी गई हो लेकिन कमेटी को काम करने के लिए अभी कल ही कहा गया है , इस कमेटी की प्रमुख सदस्य ने ही यह बात बताई है,
अब प्राचार्य महोदय अपने बचाव में तमाम जगह घूमते फिर रहे हैं लेकिन गरीब तो गरीब है उसकी मौत का क्या है मर गया तो मर गया क्या फर्क पड़ता है,प्राचार्य महोदय को भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है और ना अभी तक उसकी पत्नी और एक छोटी बच्ची को कोई आश्वासन दिया गया है कि उसको यहां सर्विस पर रखा जाएगा या नही उसको कुछ मुआवजा दिया जाएगा या नहीं ,

प्राचार्य महोदय ने तो एक तरीके से अपना पल्ला ही इस प्रकरण से झाड़ लिया है उन्होंने साफ-साफ कहा है कि उनको तो इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वह कैसे मरा, मैंने उसको ऊपर टंकी साफ करने के लिए भी नही भेजा था, प्राचार्य महोदय के इस बयान से जहां महाविद्यालय के शिक्षक व कर्मचारी भी आक्रोशित हैं, सभी शिक्षकों और कर्मचारियों ने महाविद्यालय में ताला लटका दिया है, और प्राचार्य महोदय अस्वस्थ होने के कारण अपने आवास पर आराम फरमा रहे हैं ।
जब धीरेंद्र यादव के भाई ने और उसकी पत्नी ने उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य सभी कागजात प्राचार्य महोदय से मांगे तो प्राचार्य महोदय का दो टूक जवाब था कि यह आपको आरटीआई के जरिए लेने पड़ेंगे आप आरटीआई के जरिए मांगे तभी मिलेंगे वह आरटीआई भी लगाता घूम रहा है उसको कोई सही सा उत्तर प्राचार्य महोदय की तरफ से नही मिल नहीं रहा है,

इसलिए इस प्रकरण में कहीं ना कहीं कोई झोल दिखाई दे रहा है, कि क्या उस कर्मचारी की मौत कोई दुर्घटना थी या कोई सोची समझी साजिश के तहत उसको मौत के घाट उतारा गया है , व इस घटना को किसके इशारे पर अंजाम दिया गया है, इसका पता तो जांच के बाद ही चल पाएगा लेकिन प्राचार्य महोदय की बातें तो यही साबित कर रही हैं की दाल में कुछ ना कुछ काला आवश्यक है।

कमेटी प्रमुख
