हरिद्वार। यह वह पुत्र है जिस लड़की ने इस पुत्र को जन्म दिया है, उस लड़की को आचार्य जी अपनी पुत्री के समान बताया करते थे। इस कन्या के साथ इसकी एक छोटी बहन भी और हुआ करती थी।
काफी समय से यह दोनों ही कन्याएं हरिद्वार से नदारत हैं। पहले यह आचार्य जी के निजी कक्ष में ही रहा करती थी। काफी लोगों ने इन दोनों युवा कन्याओं को आचार्य जी के कक्ष में देखा भी है ।
चर्चा उड़ी थी की उनमें से बड़ी वाली कन्या पेट से थी। आनंन-फानन में दोनों ही कन्याओं को हरिद्वार से शिफ्ट किया गया। और जो लड़की गर्भवती थी उसने एक पुत्र को जन्म दिया।

करीब 20 वर्ष से भी कम उम्र की इस कन्या ने एक पुत्र को जन्म हरिद्वार जनपद के ही किसी अस्पताल में दिया था, ऐसा बताया जाता है। लेकिन अब फिलहाल यह कन्या अपने पुत्र व अपनी छोटी बहन के साथ मुंबई में बताई जाती है ।
जहां इस कन्या का पुत्र शिक्षा ग्रहण कर रहा है ,जिस साध्वी ने यह आरोप लगाया है ,कि यह पुत्र आचार्य जी का है। वह साध्वी अखाड़ों के काफी राज जानने की बात भी करती है।
लेकिन इस साध्वी के आरोपो का जवाब देने का साहस कोई संत महंत नहीं कर पा रहा है। जिसको लेकर दाल में कुछ काला नहीं पूरी दाल ही काली दिखाई पड़ रही है।
