फोन पर कहा गया कि कुछ चुनिंदा पत्रकारों का रात्रि भोजन यानि डिनर आयोजित किया जा रहा है, लेकिन वहां पर पत्रकारों की संख्या दर्जनों थी। कितने दर्जन रही होगी इसका अनुमान आप स्वयं लगा सकते हैं। खाने से पहले की व्यवस्था भी थी , उसके बाद एक मंच सजा और महिमामंडन का दौर शुरू हो चला। मंच पर मौजूद कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता का परिचय कराया गया और फ़िर उन्होंने अपनी बात रखनी शुरू की।
उन्होंने ये भी स्पष्ट कर दिया कि वे रानीपुर भेल से दावेदार हो सकते हैं, और स्थानीय स्तर के नेता जी हरिद्वार से मदन कौशिक के सामने ताल ठोकने को तैयार बैठे हैं। यह भी कह दिया कि यदि जनता ने उन्हें चुना तो वे गंगा मैया के लाल के रूप में जनता की सेवा करेंगे।
कार्यक्रम आयोजित करने वाले शायद ये भूल गए कि जो दर्जनों पत्रकार उन्होंने इकठ्ठा किए हैं उनमे से कुछे जन्मजात संघी हैं, कुछ की गिनती बीजेपी के कट्टर अंधभक्तों के रूप में होती है, ये लोग भला क्या मदद करेंगे , कांग्रेस के विधायकी के दावेदारों की।
जितने पत्रकार वहां पर इकट्ठा किए गए उनमे से 4 या 5 को यदि छोड़ दें तो सभी लोग बीजेपी समर्थक थे, हालांकि खाटी संघी भी कांग्रेस के दावेदार के सुर में सुर मिलाते नज़र आ रहे थे। पत्रकारों की एक संस्था के कुछ मठाधीश भी कुछ इसी मुद्रा में कांग्रेस के विधायकी के दावेदार के समर्थन में थे, जैसे ये उन्हें चुनाव जितवाकर ही दम लेंगे, लेकिन ये लोग ये भूल गए हैं कि हरिद्वार के सभी पत्रकारों का ठेका लेना इन्हें महंगा भी पड़ सकता है।
अब कांग्रेस के उस राष्ट्रीय स्तर के नेता जिन्होंने कांग्रेस की विधायकी की दावेदारी प्रस्तुत की है ,उन्हें कौन समझाये कि ये बीजीपी माइंडेड पत्रकार उनका माल तो लपेट सकते हैं, बाकि इनके बस का कुछ नहीं है। कहीं ऐसा ना हो जाए कि ये कुछ दिनों बाद ये कहते हुए सुनाई दें कि एक अपनी पार्टी के व्यक्ति ने ही फंसवा दिया और हालत ” रजिया फंस गई गुंडों में ” जैसी हो जाए। सचेत हो जाओ नेता जी जिन्हें डिनर करा रहे हो उनका इतिहास तो खंगाल लेते पहले।
