उनकी शव यात्रा में निर्मल अखाड़े के संत, महंत, शिक्षक और विद्यार्थी बड़ी तादाद में शामिल हुए
हरिद्वार। साढे पांच दशक तक श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा की सेवा करने वाले सेवादार भंडारी बहादुर नहीं रहे हैं। बहादुर बड़े ही मिलनसार सेवादार थे। आज सुबह देहरादून में एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु का समाचार जैसे ही कनखल में निर्मल पंचायती अखाड़े में पहुंचा तो शोक की लहर दौड़ गई। बहादुर 75 साल के थे। बहादुर भंडारी जी के नाम से प्रसिद्ध थे और 55 साल पहले वह श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा में श्री महंत सुच्चा सिंह जी महाराज के कार्यकाल में करीब 15 बरस की उम्र में आए थे और तब से वह अखाड़े के ही होकर रह गए और उन्होंने तीन श्री महंतों श्री सुच्चा सिंह महाराज, श्री महंत बलवीर सिंह महाराज और वर्तमान श्री महंत ज्ञान देव सिंह महाराज वेदांताचार्य के कार्यकाल में निर्विघ्न होकर अपना काम किया। उन्होंने हरिद्वार प्रयागराज उज्जैन और नासिक के कई कुंभ में भंडारी के रूप में सफलतापूर्वक कार्य किया।

उनकी अंतिम यात्रा श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा कनखल से दोपहर बाद शुरू हुई और शमशान घाट कनखल में समाप्त हुई। जहां उनका निर्मल अखाड़े के संतो और उनके भतीजे ने उनका अंतिम संस्कार किया और उनकी चिता को मुखाग्नि दी।उनकी अर्थी को श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा के कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज महंत खेम सिंह महाराज आदि ने कंधा दिया।निर्मल पंचायती अखाड़ा की ओर सउनकी अर्थी में चादर औढाकर श्रद्धांजलि दी गई। श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा के कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि सेवादार भंडारी बहादुर का अखाड़े से गहरा रिश्ता था और हम सब लोग उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानते थे।

भावुक होते हुए महंत खेम सिंह महाराज ने कहा कि उन्होंने तीन श्री महंतों के साथ कार्य किया। बहादुर बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे उनका कनखल के लोगों में भी अच्छा दखल था।कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने बताया कि बहादुर सेवादार कोटद्वार के रहने वाले थे और उनके परिजन भी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और उनका 13वीं संस्कार उनके पैतृक घर कोटद्वार में किया जाएगा और अखाड़े में उनके सम्मान में श्रद्धांजलि सभा की जाएगी और 17वीं के दिन लंगर का आयोजन किया जाएगा। उनके अंतिम संस्कार में समाजसेवी अरुण खन्ना पिंकी, सुनील दत्त पांडेय आदि शामिल हुए। अखाड़े में उनकी अंतिम यात्रा को शुरू करने से पहले गुरु ग्रंथ साहब की अरदास की गई और श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा के निर्मल संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने स्वस्तिवाचन किया।
