देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी, लगातार बढ़ती लागत और परियोजना से जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक सवालों को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।
कर्नल नेगी ने कहा कि सैन्यधाम केवल एक भवन नहीं, बल्कि देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति और सम्मान से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। इसलिए इसके निर्माण में पारदर्शिता, समयबद्धता और सार्वजनिक जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने सैन्यधाम से जुड़ी पूरी टाइमलाइन सामने रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड की सैनिक परंपरा और सैन्यधाम की परिकल्पना को सामने रखने के बाद 4 नवंबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में सैन्यधाम बनाए जाने की घोषणा की।
इसके बाद 23 जनवरी 2021 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुरकुल गांव में सैन्यधाम का शिलान्यास किया। इसके कुछ समय बाद 15 दिसंबर 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुनियालगांव में सैन्यधाम का दूसरा शिलान्यास किया। उस समय परियोजना की लागत लगभग 63 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे लगभग दो वर्ष में पूरा करने की बात कही गई थी।
सैन्यधाम के लिए शहीद सम्मान यात्रा के माध्यम से 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की पवित्र मिट्टी भी लाई गई।
कर्नल नेगी ने कहा कि इसके बाद परियोजना की लागत को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। वर्ष 2022 में RTI आधारित जानकारी में परियोजना की लागत लगभग 48 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि 2024 में सामने आई RTI आधारित रिपोर्टों में यह लागत बढ़कर लगभग 99 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा परियोजना का दायरा बढ़ाए जाने का तर्क दिया गया है, लेकिन जनता को यह जानने का अधिकार है कि मूल DPR क्या थी, संशोधित DPR कब और किसके द्वारा स्वीकृत की गई तथा अतिरिक्त खर्च की पूरी स्वीकृति किस प्रक्रिया के तहत हुई।
देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी, लगातार बढ़ती लागत और परियोजना से जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक सवालों को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।
कर्नल नेगी ने कहा कि सैन्यधाम केवल एक भवन नहीं, बल्कि देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति और सम्मान से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। इसलिए इसके निर्माण में पारदर्शिता, समयबद्धता और सार्वजनिक जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने सैन्यधाम से जुड़ी पूरी टाइमलाइन सामने रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड की सैनिक परंपरा और सैन्यधाम की परिकल्पना को सामने रखने के बाद 4 नवंबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में सैन्यधाम बनाए जाने की घोषणा की।
इसके बाद 23 जनवरी 2021 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुरकुल गांव में सैन्यधाम का शिलान्यास किया। इसके कुछ समय बाद 15 दिसंबर 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुनियालगांव में सैन्यधाम का दूसरा शिलान्यास किया। उस समय परियोजना की लागत लगभग 63 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे लगभग दो वर्ष में पूरा करने की बात कही गई थी।
सैन्यधाम के लिए शहीद सम्मान यात्रा के माध्यम से 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की पवित्र मिट्टी भी लाई गई।
कर्नल नेगी ने कहा कि इसके बाद परियोजना की लागत को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। वर्ष 2022 में RTI आधारित जानकारी में परियोजना की लागत लगभग 48 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि 2024 में सामने आई RTI आधारित रिपोर्टों में यह लागत बढ़कर लगभग 99 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा परियोजना का दायरा बढ़ाए जाने का तर्क दिया गया है, लेकिन जनता को यह जानने का अधिकार है कि मूल DPR क्या थी, संशोधित DPR कब और किसके द्वारा स्वीकृत की गई तथा अतिरिक्त खर्च की पूरी स्वीकृति किस प्रक्रिया के तहत हुई।
