हरिद्वार। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के जूनियर इंजीनियरों के कारण यहां का पूरा विभाग बदनामी झेल रहा है ,यह जूनियर इंजीनियर जिस क्षेत्र में भी नियुक्त होते हैं, उस क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराते हैं, शिकायत मिलने पर एक नोटिस कट जाता है ,और नोटिस को भी इधर-उधर करने की जिम्मेदारी इन जूनियर इंजीनियर महोदय की ही होती है ।

गणेश घाट के सामने बना होटल
ज्यादा शिकायत पर बिल्डिंग सील करने की दी जाती है धमकी।
यदि बहुत ज्यादा शिकायत करता है, बिल्कुल पीछे लग जाता है ,तब उस बिल्डिंग के मालिक को बिल्डिंग सील करने की धमकी दे दी जाती है ।
उच्च अधिकारियों को उल्टा सीधा पहाड़ा पढ़ा दिया जाता है।

Jwalapur में धड़ल्ले से बन रही इमारत
ज्यादा हाय तौबा मचने पर अपने उच्च अधिकारियों को उल्टा सीधा पहाड़ा पढ़ा दिया जाता है। उच्च अधिकारियों को समझा दिया जाता है ,की हलका हाथ रखिए काम हो जाएगा, इनके साथ ए ई की भी मिलीभगत रहती है, बावजूद इसके अगर बिल्डिंग भवन या होटल को सील करने की नौबत आ भी जाती है, तब भी निर्माण कर रहा संपत्ति का मालिक बाज नहीं आता है । उसके बाद भी अगर शिकायतें विभाग के उच्च स्तरीय अधिकारियों को प्राप्त होती हैं। तब जाकर इस बिल्डिंग के मालिक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए जाते हैं।

मिठाई की दुकान
एफ आई आर का ड्रामा, पुलिस की मौज।
जब से हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण की स्थापना हुई है, मुझे ज्ञात नहीं की इन एफ आई आर के आधार पर कोई बिल्डिंग मलिक गिरफ्तार हुआ हो। और वह बिल्डिंग मलिक कभी जेल गया हो । सिर्फ fir दर्ज हो जाती है, fir का डर दिखा कर कुछ पुलिस वालों का भी भला हो जाता है । बाद में इस बिल्डिंग की सील भी खुल जाती है, fir रद्दी की टोकरी में चली जाती है । और बिल्डिंग बनकर भी खड़ी हो जाती है। बिल्डिंग बनकर खड़ी होने के बाद फिर वह कंपाउंडिंग के लिए नक्शा प्रस्तुत करवा दी जाती है । कंपाउंड होकर अवैध निर्माण वैध निर्माण में तब्दील हो जाता है ।

ऊची पहुंच वाले गंगा किनारे भी निर्माण करने में सफल हो जाते है, हरिद्वार के श्रवण नाथ नगर में बने किसी भी होटल का नक्शा नही है पास,
जो लोग ऊंचे और हैसियत वाले हैं ,उनकी बिल्डिंग चाहे आप गंगा किनारे बनाए गंगा के अंदर होटल बना लीजिए पीलीभीत हाउस श्रवण नाथ नगर में बन कर तय्यार हो चुका है, जिसे पांच सितारा होटल कहा जाता है, वह हरिद्वार की जीती जागती मिसाल है । जो गंगा के घाट पर बना हुआ है। और कोई उसको रोक नहीं पाया है गंगा के सामने जाने कितने होटल और गेस्ट हाउस धर्मशालाएं बनकर तैयार हो गई है ।किसी का नक्शा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के नियम अनुसार पास नहीं है।

Nirnjani अखाडे की पार्किंग के बराबर खड़ा होटल
किसी की कंपाउंड कर दी गई है, और अवैध निर्माण करने वालों को खुद ही हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण वाले रास्ता बता देते हैं, कि इस तरह से काम कर लो, तथाकथित दलाल रुपी पत्रकार भी HRDA के बाहर मंडराते रहते हैं।
एक काम और काफी लंबे समय से hrda में पनप रहा है ,वह है तथाकथित दलाल रूपी पत्रकारों का रैकेट, यह दलाल रूपी पत्रकार हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण में ही मंडराते रहते हैं ,ये हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के कुछ इंजीनियर के मुंह लगे होते हैं, और यह समय-समय पर शहर में जहां-जहां कंस्ट्रक्शन हो रहा होता है, इसकी सूचना विभाग को देते हैं ,विभाग पहले नोटिस जारी करता है ,और फिर सील करने की बात आती है, पहले दलाल रूपी तथाकथित पत्रकार बिल्डिंग बनाने वाले मालिक को खुद ही धमकाते है।

और उससे पैसे मांगते हैं, पैसे मिल गए तो शांति हो गई, अन्यथा मामला हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण पहुंच जाता है, वहां से भी इन दलालों को कुछ न कुछ तो प्राप्त हो ही जाता है, इस लिए ये hrda में ही मंडराते रहते हैं। हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण में कोइ फाइल बिना चढ़ावा चढाये आगे नही बढ़ती है। इसमें j E व A E की भूमिका मुख्य होती है। इन J E और A E की बेनामी सम्पत्ति की अगर जांच हो जाये तो आम जनता दाँतो तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जायेगी। कनखल , ज्वालापुर , हरिद्वार , भीमगोडा के छेत्रों की तो बात छोड़िए , बहादराबाद , रोशनाबाद तक खुले आम अवैध निर्माण होने के साथ ही अवैध कालोनियों का निर्माण भी धड़ल्ले से पता नही किसके इशारे पर हो रहा है।

चिरकुट दलाल
