हरिद्वार।
कौन करता है इस तीर्थ नगरी हरिद्वार में इतने भारी मात्रा में इन नशीले पदार्थों का व्यापार,
पुलिस वालों से मिलकर यह नशे के कारोबारी युवा पीढ़ी को कर रहे हैं बर्बाद ।
साथ ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नशा मुक्त राज्य को दिखा रहे हैं ठेंगा।
तीर्थ नगरी हरिद्वार में जयसवाल उर्फ बिहारी नाम से प्रसिद्ध एक शराब माफिया ने पूरी तीर्थ नगरी को नशे में डुबो दिया है। अब शराब के ठेकों से शराब लाने की आवश्यकता नहीं है। पूरे हरिद्वार शहर में इसी व्यक्ति की शराब चरस स्मेक बिकती है ,और इसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता है।
यह शराब हरिद्वार जनपद के एक थाना क्षेत्र में मौजूद ताजे ताजे बने शराब के एक ठेकेदार के ठेके से लाकर हरिद्वार में बेची जाती है। पुलिस सब जानते हुए भी आँखे मूंदे रहती है , क्योंकि हरिद्वार शहर के अधिकांश थानों के साहब इस बिहारी बाबू उर्फ जसवाल से मिले रहते हैं। और यह प्रतिमाह इनकी आमदनी का जरिया बना हुआ है ।इसीलिए इसके ऊपर कोई हाथ नहीं डालता है ।

पूरा गैंग बना रखा है बिहारी बाबू ने गैंग के सदस्य पूरे शहर में नशे की वस्तुओं को बेचते हैं।
इस बिहारी बाबू उर्फ जसवाल ने तीर्थ नगरी हरिद्वार में अपना पूरा एक गैंग बना रखा है। इसके गैंग में 40 से 50 लोग शराब बेचने का और चरस बेचने के साथ ही स्मेक की पुड़िया बेचने का कारोबार करते हैं । यह लोग जो इसने शराब बेचने के लिए रखे हुए हैं ।इन्होंने हर की पौड़ी से लेकर रोड़ी बेल वाला हो कनखल, ज्वालापुर ,भेल रानीपुर सब जगह शराब कारोबार का जाल बिछा रखा है । स्मेक की पुड़िए कई स्कूलों के बाहर भी बेची जाती हैं।
यदा कदा पुलिस छुटभैया को पकड़ती भी रहती है ,लेकिन असली डॉन को कोइ नही छूता है।
नशे के कैप्सूल भी इस शहर में बिकते हैं ,नशे के कैप्सूल की खेप हो चाहे स्मेक की पुड़िए हो या चरस हो या शराब की कुछ बोतले या देसी शराब के पव्वे तो पुलिस यदा-कदा पकड़ती रहती है। लेकिन इस गैंग के लीडर पर आज तक पुलिस ने हाथ नहीं डाला है ।

यह व्यक्ति जिसका नाम बिहारी उर्फ जसवाल है, इसने पूरी तीर्थ नगरी को शराब के नशे में डुबो दिया है।
तीर्थ यात्रियों को वे जिन होटलों में ठहरे होते हैं ,उन्हीं होटलों में उनको शराब उपलब्ध कराता है ये व्यक्ति ।
बाहर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को भी जो मां गंगा में आस्था लेकर गंगा में डुबकी लगाने आते हैं ,लेकिन शराब के भी शौकीन होते हैं, उनको होटल में ही शराब उपलब्ध हो जाती है। उन्हें कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती है। तमाम शहर के होटल में भी इसी की शराब सप्लाई होती है। यह व्यक्ति प्रतिदिन लाखों रुपए रोज का नशे धंधा करता है।

आका चंद दिनों में बन गया करोड़पति।
इसका आका चंद दिनों में ही शराब के कारोबार से करोड़ों में खेल रहा है, उत्तराखंड के साथ साथ कई राज्यों भी हैं इसके ठेके।
बिहारी बाबू का आका जो है जिसका शराब का ठेका है। उसका ठेका ऐसी जगह है, जहां काफी मात्रा में शराब की बिक्री ठेके से नहीं होती है। इसलिए उसने तीर्थ नगरी हरिद्वार को इस बिहारी बाबू जसवाल के जरिए अपनी तमाम शराब को बेचने के लिए गिरफ्त में ले रखा है ।और इसके ठेके यही नहीं है इस ठेकेदार के उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हरियाणा में और हिमाचल में भी इसके ठेके हैं। और यह चंद दिनों में ही करोड़पति बन गया है । चर्चा है कि यह बहुत जल्दी इस शराब के कारोबार को पूरे उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के साथ ही हिमाचल व हरियाणा में फैलाना चाहता है । इसके लिए कई बार लखनऊ के चक्कर भी लगा आया है ।अगर इसका इसी तरीके से कारोबार चलता रहा तो यह शीघ्र ही अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा ।
शराब का कारोबार करना और अपना कारोबार फैलाना कोई बुरी बात नही है, लेकिन तीर्थ की मर्यादा को भंग करना तो बुरा काम है। लेकिन नशे के कारोबारियों को बुरा भला दिखाई नही देता इनको तो दिखाई देता है, तो केवल पैसा दिखाई देता है ,इस तीर्थ की मर्यादा की रक्षा के लिये शायद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कोइ योजना बना रहे हो। क्योंकि एस एस पी नवनीत भुल्लर एक ईमानदार व कर्मठ अधिकारी है।
