हरिद्वार
स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था से कुकुरमुत्ता की तरह पैदा हो गए हैं 50% से ज्यादा नर्सिंग होम व पैथोलॉजी लैब, सीएमओ को छोड़कर सीएमओ के कार्यालय के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की आ रही है मौज प्रशासन लाचार।मरीजों के परिजनों का हो रहा है शोषण।
हरिद्वार जनपद में लक्सर, खानपुर बहादराबाद ,रोशनाबाद सलेमपुर ,रुड़की के कई ग्रामीण क्षेत्रों में खुल चुके हैं 50 प्रतिशत से अधिक अवेध नर्सिंग होम व 80 प्रतिशत पैथोलॉजी लैब अधिकांशनर्सिंग होम फर्जी है, इन नर्सिंग होम में ना तो कोई डिग्री धारी डॉक्टर बैठते हैं न ही स्टाफ ट्रेंड है।
मरीज के यहाँ पँहुचते ही उसको इस तरीके से चूसा जाता है कि उसके रिश्तेदार कहीं ना कहीं से कर्जा लेकर इन फर्जी डॉक्टरों को चढ़ाते हैं, यदि मरीज की तबीयत ज्यादा बिगड़ जाए तो या तो उसको कहीं दूसरी जगह भेजने के लिए कह दिया जाता है या फिर अगर उसके पास इतना भी समय नहीं है कि वह कहीं और जा सके तो वह अस्पताल में ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर देता है ।

उसके बाद रोते पीटते मरीज के परिजन अस्पताल में हंगामा करते हैं पुलिस आती है क्षेत्र का प्रधान आता है,नर्सिंग होम के आसपास के दलाल सक्रिय हो जाते हैं और डॉक्टर से पुलिस, प्रधान मिलकर पीड़ित परिवार का सुलह नामा करा दिया जाता है ,आज तक एक भी केस ऐसा नहीं है जिसमें किसी मरीज की मौत हुई हो उसके बाद डॉक्टर या उसके स्टाफ के विरुद्ध कोई ऐसी कार्यवाही हुई हो जिसमें उन्हें जेल जाना पड़ा हो।
यहां पैसे के बल पर सब कुछ चलता है जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी बेहद ईमानदार और पूजा पाठी अधिकारी है जिसका पूरा फायदा नीचे का स्टाफ़ उठा रहा है , सीएमओ ऑफिस में और भी बहुत सारे अधिकारी और कर्मचारी मौजूद हैं जो बिना मुट्ठी गर्म करें तो रह नहीं सकते सीएमओ ऑफिस को इतनी मोटी आमदनी है की जिसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।
कहीं भी कुछ भी हो रहा हो इनको कोई मतलब नही है मतलब है तो केवल महीने में आने वाले मोटे मोटे लिफाफों से है ,जनपद में 80 प्रतिशत से अधिक फ़र्जी पैथोलॉजी लैब चल रही हैं ,जो मानक पूरे नही करते हैं मजाल है किसी का कुछ भी बाल बांका हो जाय सीएमओ दफ्तर को इनकी तरफ देखने की फुर्सत नही है।
हरिद्वार व रूड़की में अधिकांश डॉक्टरों व नर्सिंग होम चलाने वाले डॉक्टरों ने अपने यहां ही टेस्ट करने के लिए भी पैथोलॉजी लैब खोल रखी है और मेडिकल स्टोर भी खुद ही खोल दिए हैं, डॉक्टर साहब खुद ही तो टेस्ट कर लेते हैं खुद ही दवा लिख देते हैं और अपनी फीस भी ले लेते हैं।
भगवान के बाद दूसरे नम्बर पर डॉक्टरों को ही भगवान का दर्जा दिया जाता है , ये दूसरे दर्जे के भगवान इस तरीके से मरीज को लूटते और चूसते हैं कि इसका उदाहरण देखने को शायद ही कहीं मिलेगा मानवता नाम की किसी चीज से इनका दूर तक का वास्ता नही है।
अधिकांश नर्सिंग होमो में रिसपसनिस्ट लड़कियां रखी होती है जो नर्सिंग होम में मरीज के पँहुचते ही भारी भरकम धनराशि जमा कराने का फरमान सुना देती है।मात्र 200 से लेकर 300 गज में बने इन नर्सिंग होम का नक्शा भी हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण कैसे पास कर देता है या नही करता है ये प्राधिकरण के कारिंदे ही जानते होंगे।हमारी जानकारी के अनुसार तो अधिकांश के नक्शे पास नही है।
