हरिद्वार।
उच्च न्यायालय, नैनीताल के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता ललित मिगलानी ने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल तकनीक आज शिक्षा, जानकारी और संचार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं, लेकिन बच्चों द्वारा इसके अनियंत्रित और असीमित उपयोग से उनके शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की चिंता बढ़ रही है।
अधिवक्ता ललित मिगलानी ने कहा कि छोटे बच्चों से लेकर किशोरों तक में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और लगातार स्क्रीन पर रहने की आदत उनके पढ़ाई, नींद, एकाग्रता, पारिवारिक संवाद और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। साथ ही बच्चों के सामने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, अनुचित सामग्री, फर्जी पहचान तथा इंटरनेट पर होने वाले अन्य साइबर अपराधों का जोखिम भी बना रहता है।
उन्होंने कहा कि “अभी संभलने की जरूरत है, नहीं तो आने वाली पीढ़ी के लिए देर हो जाएगी।” इंटरनेट को पूरी तरह रोकना समाधान नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने अभिभावकों, विद्यालयों और प्रशासन से निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की अपील की—
1. बच्चों के स्क्रीन टाइम के लिए आयु के अनुसार उचित सीमाएं निर्धारित की जाएं।
2. अभिभावक बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक रहें और उनसे संवाद बनाए रखें।
3. विद्यालयों में Cyber Safety और Digital Literacy को जागरूकता कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाए।
4. बच्चों को सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क के संभावित खतरों के बारे में बताया जाए।
5. बच्चों के मोबाइल एवं इंटरनेट उपयोग में “Parental Guidance” और “Parental Controls” का उचित इस्तेमाल किया जाए।
6. साइबर अपराध अथवा ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में बच्चों को चुप रहने के बजाय तत्काल अभिभावकों, विद्यालय अथवा संबंधित प्राधिकरण से सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
7. बच्चों के लिए खेल, पुस्तक-पठन, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने के अवसर बढ़ाए जाएं।
अधिवक्ता ललित मिगलानी ने कहा कि तकनीक बच्चों के विकास का माध्यम बने, उनके बचपन का विकल्प नहीं। समाज, अभिभावक, विद्यालय और प्रशासन यदि समय रहते मिलकर प्रयास करें तो इंटरनेट के दुरुपयोग से उत्पन्न अनेक समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को इंटरनेट से दूर करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें सुरक्षित, संतुलित और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाना आज की आवश्यकता है।
