हरिद्वार
हरिद्वार में अखाड़ा राजनीति गरमाई, अध्यक्ष और महामंत्री पद को लेकर घमासान
संत समाज में बढ़ा विवाद, गोपाल गिरि बोले की “बिना बहुमत कैसे मान्य परिषद?”
हरिद्वार में अखाड़ा परिषद को लेकर संत समाज के भीतर विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। अखाड़ों की वैधता, पदाधिकारियों की नियुक्ति और परिषद की मान्यता को लेकर अब तीखे आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। इसी कड़ी में अखिल भारतीय षड्दर्शन साधु समाज व अखिल भारतीय धर्म रक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की वर्तमान कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री पद को लेकर बड़ा बयान दिया है।
अखिल भारतीय षड्दर्शन साधु समाज व अखिल भारतीय धर्म रक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि महन्त डा. रविन्द्र पुरी किस आधार पर स्वयं को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष घोषित कर रहे हैं, जबकि परिषद की मान्यता के लिए 13 अखाड़ों का साथ होना अनिवार्य माना जाता है। आरोप लगाया गया कि वर्तमान परिस्थितियों में कई प्रमुख अखाड़े परिषद के साथ नहीं हैं, जिनमें अटल अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अनी, निर्वाणी अनी, दिगम्बर अनी, बड़ा उदासीन, नया उदासीन और निर्मल अखाड़ा शामिल बताए गए हैं।
श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि हरि गिरी को अखाड़ा परिषद का महामंत्री बताया जा रहा है, जबकि वे कभी श्रीमहंत नहीं रहे। कहा कि बिना बहुमत और बिना वैधानिक प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को महामंत्री घोषित नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी दावा किया गया कि आवाहन अखाड़े की नियमावली में महामंत्री और उपाध्यक्ष जैसे पदों का कोई प्रावधान ही नहीं है।

कहा कि आवाहन अखाड़े की नियमावली के अनुसार अखाड़े में कुल 17 पद ही मान्य हैं। इनमें एक अध्यक्ष, चार श्रीमहंत थानापति, चार सचिव, चार रमता पंच के श्रीमहंत और चार अष्टकौशल महंत शामिल हैं। आरोप लगाया गया कि अखाड़े की व्यवस्था और परंपरा के विपरीत भूतपूर्व पदाधिकारियों को भी बैठकों में हस्तक्षेप कराया जा रहा है, जबकि नियमावली में इसकी अनुमति नहीं है।बयान में सत्य गिरी महाराज का भी उल्लेख करते हुए कहा गया कि वर्तमान में उनके पास अखाड़े में कोई वैधानिक पद नहीं है।
उन्हें पूर्व सचिव बताया गया और आरोप लगाया गया कि वे केवल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर कार्य देख रहे हैं। दावा किया कि अखाड़ा परिषद में केवल एक रमता पंच के श्रीमहंत और एक चालू थानापति को ही प्रतिनिधित्व का अधिकार होता है, जबकि बड़े पदाधिकारी परिषद के सदस्य नहीं हो सकते।
कहा कि परिषद के वास्तविक अध्यक्ष महन्त रविन्द्र पुरी महाराज निर्वाणी अखाड़ा हैं, जबकि महामंत्री पद पर राजेन्द्र दास को वैध बताया।
धर्मनगरी हरिद्वार में उठे इस विवाद ने संत समाज के भीतर चल रही खींचतान को फिर सार्वजनिक कर दिया है। अखाड़ों की परंपरा, नियमावली और वैधानिक स्थिति को लेकर बढ़ती बयानबाजी आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकती है।
