हरिद्वार, वसुधैव कुटुम्बकम् फाउंडेशन (रजि.) के प्रयासों से अजरानंद अंध विद्यालय के दो दृष्टिबाधित बच्चों की जिंदगी में नई रोशनी की किरण जगी है। विशेष चश्मे लगने के बाद 13 वर्षीय राजकुमार और 11 वर्षीय कृष्णा की दृष्टि में काफी सुधार हुआ है, और अब उन्हें देखने में आ रही समस्या से राहत मिली है।
कैसे हुई शुरुआत: फाउंडेशन और ब्लड टीम की संयुक्त पहल
वसुधैव कुटुम्बकम् फाउंडेशन (रजि.) एवं ब्लड वॉलंटियर्स हरिद्वार की टीम के संयुक्त तत्वावधान में पूर्व में अजरानंद अंध विद्यालय में एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा एक वृहद नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में विद्यालय के लगभग 65 दृष्टिबाधित बच्चों की गहन जांच की गई। जांच के दौरान 6 बच्चों में उपचार की संभावना पाई गई, जिन्हें आगे के इलाज के लिए एम्स बुलाया गया।

उपाध्यक्ष निधि अग्रवाल ने निभाई जिम्मेदारी:
एम्स में परीक्षण के बाद 2 बच्चों – राजकुमार (13) और कृष्णा (11) में विशेष चश्मों से दृष्टि सुधार की संभावना बताई गई। इन विशेष चश्मों की व्यवस्था के लिए उपाध्यक्ष निधि अग्रवाल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर व्यक्तिगत डोनेशन के माध्यम से दोनों चश्मों की पूरी पेमेंट की। चश्मा मिलते ही बच्चों के चेहरों पर जो मुस्कान लौटी, वह अविस्मरणीय थी।
उपाध्यक्ष निधि अग्रवाल, वसुधैव कुटुम्बकम् फाउंडेशन ने बताया:”यह हमारे लिए भावुक कर देने वाला पल था।
जब राजकुमार और कृष्णा ने पहली बार चश्मा लगाया और साफ-साफ देखकर मुस्कुराए, तो लगा कि हमारी मेहनत सफल हो गई। ये चश्मा नहीं है, ये उनके लिए नई उम्मीद है, नई जिंदगी है। हमने और हमारे साथियों ने मिलकर इन चश्मों की व्यवस्था की, ताकि इन बच्चों की रोशनी अधूरी न रहे। भविष्य में भी ऐसे और शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों तक मदद पहुंचाई जाएगी। एम्स की टीम और ब्लड वॉलंटियर्स हरिद्वार का भी विशेष आभार।”_
