हरिद्वार। श्रीमहंत गोपाल गिरी महाराज ने हरिद्वार कुंभ-2027 को लेकर बड़ा बयान देते हुए आरोप लगाया कि दो अखाड़े नहीं चाहते कि हरिद्वार में कुंभ का आयोजन भव्य और दिव्य रूप में हो।
गोपाल गिरी महाराज ने विभिन्न अखाड़ों के इतिहास और स्थापना वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि कुंभ की मूल परंपरा गोस्वामी नागा संन्यासियों से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि शाही स्नान की परंपरा, अखाड़ों की स्थापना और स्नान का क्रम ऐतिहासिक रूप से निर्धारित रहा है, जिसे समय के साथ बदला गया।
उन्होंने जूना और निरंजनी अखाड़ों पर अन्य अखाड़ों पर दबाव बनाने, संपत्तियों पर कब्जे के प्रयास तथा परंपराओं से छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए।
उन्होंने कहा कि आवाहन, अटल और महानिर्वाणी अखाड़ों की प्राचीन परंपराओं का सम्मान होना चाहिए।
श्रीमहंत गोपाल गिरी महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अखाड़ों द्वारा गोस्वामी संन्यासियों और महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी वर्ग को कुंभ में प्रवेश से रोकने की बात कही जाती है, तो यह कुंभ की मूल परंपरा और सनातन व्यवस्था के विपरीत है।
उन्होंने मांग की कि कुंभ के आयोजन और अखाड़ों की परंपराओं से जुड़े सभी निर्णय ऐतिहासिक परंपराओं एवं संत समाज की सर्वसम्मति के आधार पर लिए जाएं।
उधर निरंजनी अखाड़े के सचिव श्री महंत रविन्द्र पुरी जी ने भी एक बयान देकर कहा है, की सभी 13 अखाडे एक साथ मिलकर 2027 के कुम्भ को सफल बनाने के लिए एक साथ कार्य करेंगे. और कुम्भ मेले को भव्यता के साथ संपन्न कराया जाएगा.
