रोड़ी बेल वाला तो जरायमपेशा वरों का प्रमुख केंद्र है, हाथी पुल से आगे रह रहे लोगों की झोपड़ियों में मांस पकते हुए तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित पकड़ चुके है।
हरकी पौड़ी है प्रमुख आस्था का केन्द्र, देश विदेश से बडी श्रद्धा से तीर्थ यात्री आते हैं हरिद्वार, यहां आकर वे अपने को ठगा हुआ करते है महसूस।
हर की पैड़ी पर लोग बहुत ही आस्था के साथ देश-विदेश से स्नान करने आते हैं ।लेकिन आस्था के इस मुख्य केंद्र पर आपको हर वह चीज उपलब्ध है जिसको यहां उपलब्ध होने के बारे में सोचना भी पाप है, घंटाघर मालवीय दीप पर मीना बाजार लगा रहता है ।और यह मीना बाजार इस घंटाघर से लेकर मेला नियंत्रण टावर तक दोनों ओर लगता है ।यहां आने वाले यात्रियों को यहां पर मुंबई की चौपाटी जैसा दृश्य देखने को मिलता है। यहां पर चाय समोसे खीरा मूंगफली और न जाने क्या-क्या सामान खुलेआम बिकता मिलेगा।

फूल बेचने वालों का साम्राज्य तो मालवीय दीप से लेकर सी सी आर तक व सुभाष घाट से लेकर हाथी पुल से आगे व कुशा घाट तक फैला है।
फूल बेचने वालों का तो यही नहीं पता कि उनको कितने स्थान पर फूल बेचने की अनुमति नगर निगम ने दे रखी है। यह फूल बेचने वाले जो हैं यह सब यहां के असर दार नेताओं के खास माने जाते हैं। और विगत 20 से अधिक वर्षों से नाम बदल बदल कर एक ही गैंग के पास इस फूल फहरोशी का ठेका रहता है ।आज तक कोई अधिकारी इन फूल बेचने वालों को या फूल की आड़ में फूलों के दोनों के अंदर कूड़ा रखकर गंगा में प्रवाहित कराने वालों का कोइ उपचार नही कर सका है। फूलों के साथ-साथ तमाम तरह का सिंदूर प्रसाद और गंगाजल की प्लास्टिक की केन भी यहां बिकती हैं।

हर की पौड़ी पुलिस चौकी की अनुकम्पा से चलता है यहां हर करोबार, एक लाख रुपये प्रति दीन से अधिक की होती है हरकी पौड़ी चौकी को आमदनी।
कोई इन्हें रोकने वाला नहीं है क्योंकि हर की पौड़ी चौकी की इन सभी के ऊपर विशेष अनुकंपा है इसके अलावा सुभाष घाट पर जो सुभाष घाट नाइ घाट से लेकर हाथी पुल तक तमाम दुकानें तो सजी हुई है ही अब तो यहां ठेले लेकर भी लोग बाकायदा सामान बेचने आने लगे हैं । भिखारियों का यहां साम्राज्य है ।यह भिखारी यहां जो श्रद्धालु आते हैं। उनके कपड़े तक फाड़ देते हैं।

भिखारियों को खिलाने के नाम पर रोटियों की रिसाइक्लिंग चलती है।
इन भिखारी को खिलाने के लिए रोटी सब्जी ₹20 में मिलती है । यह रोटियां भिखारी कभी नही खाते इन रोटी सब्जी को दुकानदारों को ही आधे पैसे में तुरंत लौटा देते हैं ।और यह रोटियां फिर घूम फिर कर बिकती रहती है।

भिखारियों को खाना नही पैसे चाहिए, जिससे ये चरस , शराब , टिंचरी खरीद कर नशा कर सकें।ये सभी नशे की सामग्री सुभाष घाट पर उपलब्ध रहती है।
भिखारी को चाहिए तो केवल चाहिए पैसा और उस पैसे से होता है , चरस टिंचरी शराब सुल्फा गांजा इन सब चीजों का ये करते हैं सेवन । अभी तीन दिन पहले ही नगर निगम की टीम ने हाथी पुल से आगे अतिक्रमण हटाना शुरू किया तो नगर निगम टीम को यहाँ से शराब की बोतलें एक बक्से में मिलि लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। पुलिस वालो को कुछ दिखाई नहीं देता हैं, क्योंकि पुलिस के संरक्षण में ही तो यह सारा काम होता है ।

ठेले वालों व दुकाने लगाकर कर प्रसाद की आड़ में जो नशे का कारोबार करते हैं उनसे भी प्रति माह 30 से 40 हजार रुपए पुलिस को मिलते है।
रोड़ी बेल वाला में जो झुग्गी झोपड़ी हैं। वहां पर बहुत कुछ होता है ,और उससे आगे तक जाएंगे तो बहुत सारी चीजे ऐसी देखने को मिलेगी जिनको देखकर आप अपनी आंखें बंद कर लेंगे या यह सोचेंगे की गंगा किनारे यह काम। लेकिन यहां रोकने वाला कोई नहीं है। यहां सट्टा व जुआ भी होता है। और चकरी वाले खेल भी होते हैं जसको भी जुआ कहते हैं। चकरी वाला जुआ वह बाकायदा यहां चलता है ।और यह भी सब कार्य बिना पुलिस की मर्जी के तो हो नहीं सकता है ।

बताया जाता एक अनुमान के अनुसार हर की पैड़ी पुलिस चौकी को 1 लाख रुपये से अधिक प्रति दिन की आमदनी है। पार्किंग व और दाएं बाएं अपना कारोबार धंधा करने वाले अलग रहे ,पार्किंग वालों से भी महीना बंधा हुआ रहता है ।क्योंकि पार्किंग वाले भी उल्टे सीधे काम पार्किंग में करते हैं ।तमाम तरीके की दुकाने पार्किंग में ठोक दी गई है। जो अवैध है वहां दुकान नहीं लगाई जा सकती हैं। लेकिन वहां तो बाकायदा बाजार चलता है ।उस बाजार से भी पुलिस की आमदनी होती है ।तो भाई यह तो मैंने एक लाख बहुत कम बताएं यह ज्यादा भी हो सकते हैं।

यह आमदनी अकेले चौकी इंचार्ज हजम कर जाते हो ऐसा सम्भव नही है, इसमें से किस किस का हिस्सा होता है ये तो चौकी इंचार्ज बेहतर जानते होंगे।
इस तीर्थ नगरी हरिद्वार के बारे में जो धारणा बनाकर श्रद्धालु यहाँ आते हैं उसकी ना तो यहां के नेताओं को चिंता है और ना यहां के अधिकारियों को चिंता है। उन्हें तो केवल चाहिए तो चाहिए पैसा और नेताओं को अपने वोट बैंक, जितने भी यहां पर जरायमपेशा करने वाले लोग हैं , वह सब असरदार खददरधारियों के ही चेले चपाटे हैं । खद्दरधारी धारी नेताओं के चेले चपाटो की तो बात छोड़िए यहां फूल फहरोशी में तो नेताओं की भी पत्ती तक रहती है।

क्योंकि फूल फरोशी के काम में नौ के 100 होते हैं। कितने पैसे में ठेका हो रहा है यह भी कोई बताने वाला नहीं है ।किसके नाम ठेका हुआ है यह कोई बताने वाला नहीं है । ठेके की नीलामी कब होगी कितने में होगी यह कोई बताने वाला नहीं है ।पूछा जाए तो किससे पूछा जाए , यह कारोबार ऐसा है इसको तब बताया जाता है जब ठेका चहेते ठेकेदार को दे दिया जाता है।

गंगा के नाम पर केवल और केवल कमाई, गंगा को आस्था का नही कारोबार का साधन मानकर माल कमाने में लगे हैं ।
केवल और केवल पैसा इस गंगा के नाम पर यहां लोग कमा रहे हैं ।गंगा की शुद्धता से गंगा की पावनता से गंगा की पवित्रता से इनका कोई लेना देना नहीं है। यह तो गंगा के नाम पर कमाई करने के लिए बैठे हुए हैं। कोई रोटी बेच रहा है कोई लंगर चला रहा है , और न जाने किस किस तरीके की चीज यहां पर बेची जाती है। और लोगों का बेवकूफ बनाया जाता है। कह कोई सकता नहीं ,अगर किसी के साथ घटना घट जाती है तो वह पुलिस चौकी पर जाता है उसकी कोई सुनता नहीं है।
ज्यादा शोर शराबा होने पर एप्लीकेशन को लिखवा कर उसे रख लिया जाता है ।और फिर यात्री बेचारा लुटा पिटा अपने घर चला जाता है । गंगा सभा की तो बात ही छोड़ दीजिएगा उनका साफ कहना है। हम तो गंगा सभा कार्यालय से जहां तक हमारा कार्य क्षेत्र है उसको देखते है । उसके अलावा तो नगर निगम का है वह जाने उनका काम जाने हमसे कोई मतलब नहीं है। तो उनसे तो कोई मतलब नहीं है ।वह तो जहां हर की पौड़ी पर उनका कार्यालय है और जहां गंगा आरती होती है वहां तक कि उनके पास रखरखाव की जिम्मेदारी है इसके अलावा उनसे कोई लेना देना नहीं है ।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार
जेब कतरे व उठाई गिरे भी यहाँ अपने करतब दिखाते रहते है।
जेब कतरे व उठाई गिरे यहाँ घूमते रहते हैं आप गंगा में डुबकी लगाइए हो सकता है। आपका बैग और सारा सामान ही गायब हो जाए। और आप कच्छे बनियान में रह जाये आप इस बात की सूचना अगर चौकी हर की पौड़ी पर देंगे तो आपकी तहरीर ले ली जाएगी ।और कह दिया जाएगा की हम आपका सामान मिलेगा तो तुरंत सूचना देंगे आप निशचिंत रहिए आप निश्चिंत होकर जाइए और गंगा स्नान कीजिए, अब वह क्या गंगा स्नान करेगा लुटा पिटा आदमी,
कप्तान साहब आप एक ईमानदार व कर्मठ पुलिस अधिकार है। पुलिस में और भी अधिकारी ईमानदार व कर्मठ है।लेकिन आपसे ही है कुछ उम्मीद है, आप ही कलयुग में भगीरथ बनकर इस मोक्ष दायनी को इन गंगा के के नाम पर धंधा करने वालो से मुक्ति दिला सकते है, शायद इसी लिए माँ ने आपको हरिद्वार बुलाया है।
