हरिद्वार । मुख्य आरोपी वरुण चौधरी I A S सहित अन्य सभी आरोपी मौज ले रहे हैं। इस 58 करोड़ के घोटाले को 1 वर्ष होने जा रहा है, बावजूद इसके घोटाले की फाइले अभी तक सचिवालय की धूल फांक रही हैं ।
कही इस भृष्ट वरुण चौधरी को बचाने के प्रयास तो नही हो रहे हैं।
शायद अधिकारियों की समझ में नहीं आ रहा हो के इस भ्रष्ट आईएएस वरुण चौधरी को कैसे बचाया जाए, 1 वर्ष हो जाने के बावजूद भी अभी तक मामला कहां लटका हुआ है ।यह बताने वाला कोई नहीं है।

एक साल किसी प्रकरण को होने से पूर्व केंद्र सरकार से भी प्रकरण की जांच के लिए और समय मांगने के लिए केंद्र सरकार को सूचित करना पड़ता है, लेकिन अभी इस तरह की भी कोई प्रकिया शुरू नहीं की गई है।जबकी इसी जून माह के प्रथम सप्ताह में इस घोटाले की जाँच को एक वर्ष पूरा हो जायेगा।
आपको बता दें की उत्तराखंड का बहुत चर्चित घोटाला हरिद्वार नगर निगम के नगर आयुक्त रहे वरुण चौधरी ने 58 करोड रुपए की बंदर वाट कर हड़प लिए थे। मामला नगर निगम के बीजेपी के बोर्ड के सामने आया तो नगर निगम की मेयर किरण जैसल ने मामले की जांच कराने व नगर निगम की 58 करोड रुपए की रिकवरी कराने की घोषणा की थी। लेकिन किरण जैसल की घोषणाएं भी केवल खोखली साबित होकर रह गई हैं।

इस बहुत चर्चित प्रकरण में नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त महोदय वरुण चौधरी I A S ने 58 करोड रुपए की वह जमीन खरीदी थी। जो मात्र 5 करोड रुपए की भी जमीन नहीं थी। यह जमीन नगर निगम का कूड़ा कचरा जहां पड़ता है ,उससे लगी हुई है।
35 बीघा इस जमीन को बेचने के लिए जमीन के मालिक विगत 10 वर्षों से अधिक से प्रयास रत थे , लेकिन किसी भी अधिकारी की यह हिम्मत नहीं हो रही थी ,कि वह इस प्रकरण को छू भी सके। लेकिन जांबाज वरुण चौधरी ने इस जमीन की तत्कालीन एस डी एम से 143 भी कराई , एस डी एम ने भी महनो का काम एक सप्ताह में कर दिया ।और इस जमीन को ऊंचे दामों पर वरुण चौधरी ने 58 करोड़ में नगर निगम के लिए खरीद लिया। वरुण चौधरी के सिर पर किसी बड़े खिलाड़ी का हाथ तो निश्चित रहा होगा , क्योंकि 58 करोड़ रु अकेले हजम कर जाने की औकात वरुण चौधरी की नही हो सकती।

इस जमीन को खरीदने के लिए न तो कोई निविदा आमंत्रित की गई ,ना ही राज्य सरकार से कोई अनुमति प्राप्त की गई। केवल तत्कालीन जिला अधिकारी कमरेंद्र सिंह को अपने I A S होने का रोब दिखाकर धोखे से वरुण चौधरी ने कमरेंद्र सिंह से एक फाइल पर हस्ताक्षर करा लिए। लेकिन बोर्ड न होने के कारण 58 करोड़ के भुगतान के लिए प्रशासक से अनुमति लेना अनिवार्य होता है ,यह अनुमति लेना भी वरुण चौधरी ने उचित नही समझा और सारे चैक खुद ही काट दिये ।
मामले की भनक लगते ही , लोकप्रिय चिंगारी सांध्य दैनिक ने जब इस मैटर को उठाया तो। उत्तराखंड की राजधानी में हड़कंप मच गया। और उत्तराखंड के ईमानदार मुख्यमंत्री धामी जी को प्रकरण की जांच के आदेश देने पड़े। इस प्रकरण में सबसे पहले वरुण चौधरी को निलंबित किया गया।

तत्कालीन जिलाधिकारी , बलि का बकरा
उसके बाद जांच आईएएस अधिकारी रणवीर चौहान को सौपी गई ,रणवीर चौहान के द्वारा की गई गहन जांच के बाद रिपोर्ट शासन को सौप दी गई।मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट देख कर हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी कमरेंद्र सिंह, एसडीम वआठ अन्य नगर निगम के कर्मचारी व अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।
लेकिन इस प्रकरण को अगले माह 1 साल पूरा होने जा रहा है । इसे घोटाला कहें या सीधे सीधे गबन को एक वर्ष पूरा हो जाएगा। लेकिन इस प्रकरण की जांच अभी पूरी हुई है या नहीं इसकी जानकारी देने वाला कोई नहीं है।
घोटाले की फाइलें कहां दबी हुई है। कुछ पता नही,
फाइलें कहां दबी हुई है, क्यों फाइलों को दबाया जा रहा है। यह तो राज्य सरकार जानती होगी ।लेकिन आम चर्चा यह बताई जा रही है । की फाइलों को दबाने के पीछे इस प्रकरण के मुख्य आरोपी वरुण चौधरी को बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है।
क्योंकि जो जांच होनी थी वह संभवत 1 साल में पूरी तो अवश्य हो गई होगी ।
विजिलेंस जांच भी हो चुकी होगी। लेकिन इन जांचों के बाद जो निष्कर्ष निकल कर आया होगा, वह अभी राजधानी में आला अधिकारियों की टेबलों पर शायद सबसे नीचे दबा पड़ा हो। राज्य सरकार के इस रवैये के कारण इस महा घोटाले के दोषीयो को कोई लाभ पहुंचाने की साजिश तो नहीं हो रही है। यदि हो रही है तो कौन अधिकारी हो सकता है ,जो इस महा घोटाले की जांच रिपोर्ट को उजागर नही होने दे रहा है।

अभी तक राज्य सरकार ने व नगर निगम हरिद्वार की मेयर ने भी 58 करोड रुपए की लूट के मुख्य आरोपी वरुण चौधरी से इस भारी भरकम 58 करोड़ की रकम की रिकवरी का भी कोई प्रयास नहीं किया है ।
अब देखना यह है की यह प्रकरण क्या रंग दिखाता है, क्योंकि एक तरफ राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य से भ्रष्टाचार मिटाने और और भृष्ट अधिकारियों को किसी भी सूरत में चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो ,को किसी भी कीमत नही बख्शने का वादा राज्य की जनता से कर चुके हैं बावजूद इसके इस भ्रष्ट अधिकारी को अभी तक कोइ ठोस पनिशमेंट देने मे इतनी देरी क्यों की जा रही है ।यह तो राज्य के उच्च अधिकारी व माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहतर जानते होंगे।
चर्चा यह भी है की वरुण चौधरी ने इस 58 करोड रुपए की धनराशि में से जो शायद 50 करोड़ की धनराशि वरुण के हिस्से मे आई है, में से 7 करोड रुपए की धनराशि हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण में काफी बड़े कई प्लाट खरीदने के लिए हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को भी दी है । उसके बावजूद और कहां-कहां वरुण चौधरी ने अपना पैसा इन्वेस्ट किया है इसकी भी संभवत जांच पड़ताल जांच एजेंसियों ने की होगी,
राज्य की जनता को इस बहु चर्चित घोटाले के दोषियों को सजा मिलने का इंतजार है। और राज्य के ईमानदार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा राज्य की जनता से किये गये वादे की प्रतीक्षा की जा रही है।
