प्रेस क्लब और शराब व्यवसायी के मधुर संबंधों का हवाला देते हुए मैंने एक खबर प्रकाशित कर दी ,और इस खबर के साथ ही अपना त्यागपत्र भी माननीय प्रदेश अध्यक्ष सुनील दत्त पांडे जी व तमाम पोर्टल्स पर भेज दिया ।
सारे दिन इस खबर को देखकर लोगों ने जब छिछालेदर की तब जाकर इनके सलाहकार बोर्ड के डायरेक्टर चाणक्यपुरी ने सलाह दी होगी। की
अपना बचाव करने के लिए नरेश गुप्ता को यूनियन से बाहर निकालने का एक मैसेज डाल दिया जाए ।
बस चाणक्यपुरी का आदेश होते ही तुरंत मैसेज टाइप हुआ और शाम को 4 बजे मैसेज पोर्टलों पर भेज दिया गया ।
अब आम जनता या कोई भी निर्णय कर सकता है कि जब सुबह ही मैंने इस्तीफा दे दिया तो उसके बाद निष्कासन की क्या आवश्यकता पड़ी। बुद्धिमान लोग हैं।
आभारी हूँ मुझ पर संगठन विरोधी व संदिग्ध गतिविधियों का आरोप सुनील पांडेय जी द्वारा लगाया गया है ।देशद्रोह का आरोप नहीं लगाया गया।इसका जवाब तो इन महोदय को देना ही पड़ेगा।
जिन महोदय ने ये आरोप लगाए हैं उनकी। समाज सेवा और दान देने की प्रवृत्ति को पूरा शहर व कुछ अधिकारी व नगर के साधु संत भी अच्छी तरीके से जानते हैं।
कितनी बार पांडेय जी का कनखल में सार्वजनिक रूप से सम्मान हो चुका हैं । अशोक त्रिपाठी जी के भाई दिनेश त्रिपाठी ने पांडे जी का कनखल में एक बार बहुत ही भव्य स्वागत किया था
पांडेय जी को पूरे देहरादून से लेकर पूरे उत्तराखंड को देखना रहता है। फिर दिल्ली को देखना है। और फिर राजनेताओं को देखना है। उनके मनमुटाव दूर कराने हैं। पांडेय जी बहुत व्यस्त इंसान है।
मैं इनकी सारी उत्तम गतिविधियों का पूरा चिट्ठा खोलूंगा , मैं पहले ही कह चुका हूं, मैं इन पूजनीय महोदय के सारे उत्कृष्ट कार्य आप लोगों को बताऊंगा।
तभी जाकर इस प्रेस क्लब के बारे में नगर की जनता को पता चलेगा की, यहां क्या-क्या हो रहा है।
जो इस प्रेस क्लब के कारिन्दों की करतूतों को उजागर करे ,उसकी गतिविधियों को संदिग्ध बताया जाता है। प्रेस क्लब में प्रेस क्लब के नाम पर जो कारोबार चल रहा है । वह अब चलने नहीं दिया जाएगा।
यह प्रेस क्लब किसी के पिताजी की बपौती नहीं है।
यह सरकारी प्रेस क्लब है, सरकार के धन से क्लब बना है। सरकार ने जमीन दी है, इसमें केवल पत्रकारों को बैठने और पत्रकारों को इसका रखरखाव और संचालन करने की जिम्मेदारी दी गई है ।
पत्रकारों को यह अधिकार नहीं दिए गए हैं, कि जो असली पत्रकार हैं। वह तो प्रेस क्लब से बाहर घूमें और अर्जी फर्जी वह पत्रकार जिनका पत्रकारिता से दूर तक का भी वास्ता नहीं है। और वे इनके मुंह लगे चाटुकार हैं। वह प्रेस क्लब के मेंबर बने रहे।
अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा इसके लिए चाहे लड़ाई सड़कों तक पर लड़नी पड़े । यह लड़ाई तो अब लड़ी जाएगी ।और जो लोग प्रेस क्लब के नाम पर अपना अपना उल्लू सीधा कर रहे है, अब ऐसे लोगों से प्रेस क्लब को मुक्ति दिलाई जायगी ।
प्रेस क्लब के आचार्य महामंडलेश्वर जी जिस थाली में खाते है ,उसी में छेद करते है। ये बात कनखल सहित नगर के अधिकांश लोग जानते हैं।ये बिना मतलब किसी के पीछे नही लगते है।
नगर पालिका से दुकान लेकर बेच खाई
सतपाल ब्रह्मचारी जब नगर पालिका के अध्यक्ष थे तब इसने कनखल में एक नगर पालिका की दुकान अपने स्वर्गीय भाई के नाम सतपाल ब्रह्मचारी से करवा ली थी। लेकिन इसके भाई कमल का निधन हो गया, कमल बहुत ही अच्छा इंसान था, उसके निधन के बाद इसने दुकान भारी भरकम राशि लेकर बेच दी ये तो एक उदाहरण है।
इन अत्यंत ईमानदार पत्रकार साहब के कारनामों की पूरी फेरिस्त है मेरे पास, धीरे धीरे इनकी सारी करतूतों से अवगत कराऊंगा।
