नरेंद्र नगर, टिहरी विकास प्राधिकरण के वीसी व सहायक अभियंता के बीच घमासान V C डी पी सिंह है चर्चित अधिकारी ,करोड़ों रु के भूमि घोटाले में 2 वर्ष तक बड़ी हवेली की शोभा बढ़ाकर लौटे हैं, और मलाईदार पोस्टिंग प्राप्त करने में हो गए हैं कामयाब।
यह प्रकरण टिहरी विकास प्राधिकरण में नक्शे पास करने को लेकर है ,नक्शे पास करने का ज्यादातर कार्य सहायक अभियंता को करना होता है, वही नक्शे पास करने में विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, टिहरी जनपद के नरेंद्र नगर में एक नक्शा पास करने को लेकर इन दोनों के बीच तनातनी हो गई मामला प्रशासन तक पहुंच गया है ,अखबारों की सुर्खियां बनने के साथ-साथ पोर्टलों पर भी आ गया है।

मामले की अंदर तक खोजबीन की गई तो ना तो डी पी सिंह कुछ बताने को तैयार थे, और ना पंकज पाठक कुछ बताने को तैयार थे, लेकिन जो चीज नरेंद्र नगर में सामने आई है उसके अनुसार एक नक्शा पास करना था, लेकिन उस नक्शे में कुछ कमियां थी इसलिए वह नक्शा पास नहीं किया गया , और इसी बात से साहब खफ़ा हो गए,
टिहरी विकास प्राधिकरण के V C साहब उस नक्शे को पास करने में दिलचस्पी रखते थे बस इसी प्रकरण को लेकर दोनों में तनातनी हो गई ,
किसी दूसरे मामले मे V C साहब ने पंकज पाठक को कानूनी शिकंजे में जकड़ने का प्रयास किया है, डी पी सिंह ने टिहरी विकास प्राधिकरण का वीसी रहते हुए , कई बड़े बड़े महत्वपूर्ण कार्य किये हैं ऐसी जानकारी भी प्राप्त हुई है, दो चार को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर निर्माण की सीलिंग की कार्यवाही भी नहीं हुई है,

पंकज पाठक वर्तमान मे नरेंद्र नगर में विराजमान है, अब इस नक्शा प्रकरण की शासन द्वारा जांच चल रही है, और आप तो जानते हैं कि हमारे यहां जांच किस तरीके की होती है, क्योंकि जब डी पी सिंह जैसे महान कलाकार 2 वर्ष की कारागार में शोभा बढ़ाने के बाद बाहर आते ही पहले डोईवाला चीनी मिल के प्रबंधक बनाए गए ,
उसके बाद महत्व पूर्ण जिम्मेदारी जो टिहरी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की है और हुड्डा के भी यह अधिकारी बनाए गए हैं यह दो दो कुर्सी प्राप्त करने में सफल हो गए हैं ।
इन महोदय में कोई ना कोई तो काबलियत होगी ही तभी तो इनको दो विभागों की कुर्सियों से नवाजा गया है जाहिर है बहुत ही ईमानदार, कर्मठ ,कार्य के प्रति लगन शील अधिकारी होंगे डी पी सिंह, तभी तो उत्तराखंड सरकार की पसंद बने हैं ,अन्यथा जिस तरीके से डी पी सिंह साहब 2 वर्ष की जेल यात्रा करके आए हैं उनके इस कार्य को नजरअंदाज करते हुए उत्तराखंड सरकार ने अति महत्वपूर्ण दो-दो कुर्सियों से इनको नवाजा है, देखना है यह जांच भी किस दिशा में जाती है और क्या रंग लाती है लेकिन इस प्रकरण में ना तो डी पी सिंह कुछ बोलने के लिए तैयार हैं और ना पंकज पाठक कुछ बोलने के लिए तैयार है दोनों का ही कहना है की जांच चल रही है हम कुछ कह नहीं सकते अब देखो यह जांच कब तक चलेगी और इस जांच का परिणाम क्या होगा । जो भी होगा दोनों के लिए ही सुखद होगा।

