हरिद्वार। कार्यक्रम में पैसे भी खर्च होते हैं। अति विशिष्ट लोगों को आमंत्रित किया गया ।गवर्नर साहब तक आए ,इन सभी आयोजनों के नाम पर जमकर शहर से चंदा वसूली की गई होगी ।घर से तो कोई इस तरीके के कार्यक्रम करता नहीं है ।
कार्यक्रम में जिन दर्शकों , अतिथियों को बुलाया गया था ।हालात यह थे उनमें से अधिकांश को तो भोजन ही नही मिला। यह तो उस दिन का हाल था । जिस दिन गवर्नर साहब को बुलाया गया था। और बाकी चार कार्यक्रमों में किसी को रोटी मिली किसी को नहीं मिली किसी को पानी मिला नहीं मिला या किसी को जो नाश्ते का आयोजन किया था। वह मिला कि नहीं मिला, इससे आयोजकों को कोई मतलब नहीं।
उन्हें तो केवल अति विशिष्ट लोग आ जाएं। उनके साथ फोटो खिंच जाएं। वह फोटो फेसबुक पर डाल दिये जाएं। और शहर की जनता इन आयोजको की पहुंच समझ ले। खासकर जिन लोगों को यह फोटो दिखाना चाहते हैं। वह लोग यह फोटो देख ले ।और इनका कार्यक्रम आगे चलता रहे। यह है इन पांच बार के कार्यक्रम की सही प्रस्तुति,
हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर पूरे हिंदुस्तान भर में किसी भी जगह यह कार्यक्रम नहीं मनाए गए, केवल हरिद्वार प्रेस क्लब में ही यह कार्यक्रम एक बार नहीं पांच-पांच बार मनाए गये। पांच पांच बार कार्यक्रम के लिए अच्छी खासी धन राशि खर्च होती है। इन कार्यक्रमों का क्या उद्देश्य था किसी को नही पता।
था तो केवल इतना था। मंच सजाओ और अधिकारियों के साथ और नेताओं के साथ और संतों के साथ फोटो खिंचवाओ ,और अपना जलवा दिखाओ ।यह है 200 वर्ष पूरे होने पर हिंदी पत्रकारिता के प्रेस क्लब के पाँच कार्यक्रम की उपलब्धि ।
