हरिद्वार ,खाद्य विभाग निरंतर कर रहा है छापेमारी पकड़ रहा है नकली पनीर व दूध ,डेट एक्सपायर की कोल्ड ड्रिंक व अन्य खाद्य पदार्थों पर भी रहती है निगाह , लेकिन बड़ी मछलियों पर हाथ डालने से बचता है।
हरिद्वार में कुकुरमुत्ते की तरह पैदा हो गई हैं तमाम बेकरियां व होटल क्या-क्या मिलाकर आपको खिला रहे हैं इसके बारे में खाद्य विभाग शायद दीपावली के बाद कार्रवाई करने के मूड में दिखाई देता है।
हरिद्वार में खाद्य विभाग उत्तराखंड के खाद्य सचिव विनय शंकर पांडे जी के आदेश व जिला अधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित के निर्देश का पालन करते हुए प्रतिदिन पूरे जनपद में दुकानों पर छापेमारी कर रहा है ,व सड़क पर ही चलते हुए टैंकर व छोटा हाथी को पड़कर उसमें मौजूद दूध या अन्य खाद्य पदार्थों को पकड़ने के साथ-साथ नकली पनीर को भी पकड़ने में सफलता हासिल कर चुका है।

लेकिन बड़ी दिलचस्प बात यह है की हरिद्वार जनपद की तो बात छोड़ दें हरिद्वार शहर में ही कम से कम 300 से ज्यादा बेकरियां होगी इन बेकरियों में कुछ बड़ी बेकरियां भी है, और छुटपुट बेकरियों की तो गिनती ही नही हैं है।
मिठाई की दुकाने भी हैं कुछ बड़ी दुकान हैं और कुछ छोटी है ,होटल भी काफ़ी है भोजनालय कुछ बड़े होटल है और कुछ छोटे है।
अब बेकरियों की बात ले लेते हैं बेकरियां जो बिस्किट बनाकर ₹1000 से लेकर ₹2000 किलो तक के बिस्कुट बेच रही हैं , ये बिस्किट किस आटे से किस तरह के घी से या मक्खन से बनाकर उपभोक्ताओं को सप्लाई किये जा रहे हैं इसके बारे में शायद ठीक-ठीक जानकारी खाद्य विभाग को नहीं है, खाद्य विभाग के पास तो शायद इस बात की भी जानकारी नहीं होगी कि हरिद्वार में कितनी बेकरियां हैं।

अधिकांश दूध का धंधा करने वालों ने बेकरियां खोल ली है अधिकांश खाद्य सामग्री बेचने का काम करने वालों ने भी बेकरियां खोल ली हैं, अधिकांश हलवाइयों ने बेकरियां खोल ली है , इन बेकरियों में से कुछ पर नमकीन भी बनने लगी है नमकीन किस तेल में किस तरीके के बेसन से या किस तरीके के आटे से बनाई जा रही हैं इसका भी कोई अता पता नहीं है।
हरिद्वार खाद्य विभाग के पास शायद स्टाफ की कमी होगी इसी वजह से समय नही मिलता होगा फिलहाल साहब के आदेशों का पालन करने के लिये छापों की कार्यवाही तो करनी ही है , इस लिये छोटे- मोटों से ही काम चलाना पड़ता है।

अभी दो दिन पूर्व भारी मात्रा में पनीर पकड़ कर नष्ट कराया गया है , लेकिन बड़ों पर हाथ डालने से बचने में के पीछे कारण समझ में नहीं आ रहा है , हर गली मोहल्ले में कबाब व टिक्के जैसी वस्तुए लोहे की सिंको पर टंगी रहती है, और शाम को वहां भीड़ लग जाती है
यह क्या चीज है यह नहीं पता है कि यह कबाब है वेज कबाब हैं या टिक्का है वेज टिका है क्या है यह पता नहीं है ,किस तरीके से बना रहे हैं क्या यह इसमें मिला रहे हैं कोई पता नहीं है ,और खाद्य विभाग के पास कहां इतना टाइम है कि इनको जाकर देखेंगे और चेक करेंगे तुम क्या कर रहे हो और क्या बेच रहे हो ।
नगर के एक नामी होटल में तो देशी घी की मात्र तीन पूरी ₹200 में मिलती है। अब आप समझ लीजिएगा तीन पूरी लाइन लगा के बिकती है अब भगवान जाने यह किस तरह की पूरियां किस चीज से बनती हैं क्या होता है कुछ पता नहीं है।

अगर विभाग के साहब से पूछो तो वह यही कहेंगे समय-समय पर हम जांच करते रहते हैं और सैंपल भेज दिए जाते हैं ,सैंपल रिपोर्ट कब आएंगी साल भर बाद आएंगी 6 महीने बाद आएंगी कुछ पता नहीं है, जब आएंगी और कुछ छोटी मोटी कमी पाई गई तो हजार 2 हजार रुपए जुर्माना हो जाएगा काम चलता रहेगा ।
जबकि सचिव विनय शंकर पांडे के सख्त निर्देश हैं कि किसी को भी जो भी व्यापारी खाद्य पदार्थ बेचते हैं या उनका कारोबार करते हैं उनके खाद्य पदार्थों की जांच की जाए और कमी मिलने पर कड़ाई से उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए , खाद्य सचिव देहरादून बैठते हैं उनके आदेशों का पालन किया जाता है।

आदेशों का पालन अच्छी तरीके से हो रहा है, यह बात अलग है कि अगर आप खाद्य विभाग से पूछेंगे की हरिद्वार में कितनी बेकरियां हैं , तो शायद उन्हें पता नहीं होगा देख कर बताएंगे या यह पूछा जाए कि कितने होटल या कितनी पूरी छोले कुलचे की और पूरी आलू की कितनी दुकान है यह भी नही पता है।
कितने खाने के होटल हैं यह भी नहीं पता है स्टाफ की इतनी कमी है कि एक साहब तो जो खाद्य विभाग हरिद्वार में ही मौजूद हैं , रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे छूट गए फिर हरिद्वार में आकर तैनात हो गए हैं।

तो यह तो स्टाफ की कमी के कारण ही हो रहा होगा काम भी तो इन्ही लोगों से लेना है, हम यह नहीं कह रहे हैं की हरिद्वार की सारी बेकरियों में गलत तरीके से खाद्य पदार्थों को तैयार करके बेचा जाता है, या सारे पूड़ी कचौड़ी वाले गलत तरीके और आटे से सामान तैयार कर उपभोक्ताओं को परोसते हैं।
लेकिन खाद्य विभाग को चाहिए कि वह उनकी जांच कर ले कितने बेकरी वाले हैं कितनो के पास लाइसेंस है एक लाइसेंस की फीस कितनी है यह तो कम से कम पता चल जाए असली फीस की बात कर रहे हैं सरकारी फीस की , इधर-उधर की फीस की बात नहीं कर रहे हैं,लाइसेंस फीस पता चल जाए कि सरकारी फीस कितनी है क्या-क्या मानक है इनके किस तरीके से यह बेकरियां चला सकते हैं।
कुछ तो मानक होंगे एक साहब की तो बहुत बड़ी दुकान है मिठाई की और उनके यहां बेकरी का भी काम होता है इनका सारा सामान उत्तर प्रदेश से बनकर आता है यहां तो इनकी मिठाइयां और बेकरी का सामान बिकता है, इनकी बेकरी के समान को देखने के लिए और मिठाई को बनते हुए देखने के लिए उत्तर प्रदेश जाना पड़ेगा उत्तर प्रदेश कौन जाए लियाजा काम जैसे चल रहा है चलने दो।

विनय शंकर पांडेय,आईएएस खाद्य सुरक्षा आयुक्त
